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राजनीति

SC/ST एक्ट पर अदालती फैसलों से आक्रोश: चंद्रशेखर आजाद ने न्यायिक व्याख्याओं पर उठाए सवाल, पुनर्विचार याचिका की घोषणा

चंद्रशेखर आजाद ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसलों पर चिंता जताई है। उन्होंने 'सार्वजनिक दृष्टि' की व्याख्या को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करने की घोषणा की।
द्वारा News Room 📅 14 May 2026 👁️ 152 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
SC/ST एक्ट पर अदालती फैसलों से आक्रोश: चंद्रशेखर आजाद ने न्यायिक व्याख्याओं पर उठाए सवाल, पुनर्विचार याचिका की घोषणा

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के संदर्भ में माननीय न्यायालयों द्वारा दी गई हालिया व्याख्याओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आजाद ने आरोप लगाया है कि न्यायिक आदेशों के जरिए इस सशक्त कानून के प्रभाव को सीमित किया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत है।

विवाद के केंद्र में दो मुख्य फैसले

चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पोस्ट में दो विशिष्ट न्यायिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कानून की बदलती परिभाषाओं पर सवाल उठाए हैं:

  1. उच्चतम न्यायालय का फैसला (11 मई): माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में "सार्वजनिक दृष्टि" (Public View) की शर्त को रेखांकित किया। आजाद के अनुसार, इस शर्त के कारण निजी स्थानों पर दी गई जातिसूचक गालियों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की संभावना बढ़ गई है।

  2. कलकत्ता उच्च न्यायालय का निर्णय (दिसंबर 2025): कोर्ट ने कहा था कि फोन पर दी गई जातिसूचक गाली पर SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते, क्योंकि वह 'सार्वजनिक स्थान' या 'सार्वजनिक दृष्टि' में नहीं आता।

आजाद के मुख्य तर्क और सवाल

भीम आर्मी प्रमुख ने न्यायपालिका की इन व्याख्याओं पर कड़े सवाल खड़े किए हैं:

  • लोकेशन बनाम अपमान: क्या दलितों का अपमान अब "स्थान" और "माध्यम" (जैसे फोन या चारदीवारी) देखकर तय होगा?

  • अपराध की गंभीरता: क्या बंद कमरे में या डिजिटल माध्यम से किया गया जातीय अपमान कम गंभीर है?

  • पीड़ितों की कठिनाई: इस तरह के फैसलों से अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं और पीड़ितों के लिए न्याय पाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

आगामी कदम: पुनर्विचार याचिका (Review Petition)

चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया है कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए इन फैसलों को चुनौती देना आवश्यक है। उन्होंने घोषणा की है कि इस संबंध में शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर की जाएगी।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। लेख में उद्धृत कानूनी व्याख्याएं उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक विचारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। किसी भी कानून या अदालती फैसले की सटीक जानकारी के लिए संबंधित न्यायालय के आधिकारिक आदेश और विधिक विशेषज्ञों की राय का संदर्भ लें।


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