करौली: रूपपुरा में महिला श्रमिकों को सिखाए गए POSH कानून के गुर, उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान
रूपपुरा सपोटरा में जिला प्रशासन और एक्शनएड इंडिया द्वारा महिला श्रमिकों के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन। जानें POSH अधिनियम 2013, शी-बॉक्स पोर्टल और कार्यस्थल पर सुरक्षा के अधिकारों के बारे में।
रूपपुरा, करौली | 11 मई 2026
कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सभ्य समाज की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ, जिला प्रशासन और एक्शनएड एसोसिएशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में रूपपुरा (सपोटरा) में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य केंद्र 'पोश अधिनियम' (POSH Act) और महिला श्रमिकों के कानूनी अधिकार रहे।
क्या है POSH अधिनियम और क्यों है यह जरूरी? एक्शनएड के जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' महिलाओं को एक सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। अक्सर ईंट भट्टों, भवन निर्माण, खानों और घरेलू कार्यों में लगी महिला श्रमिकों को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह कानून उन्हें ठेकेदार, मालिक या सहकर्मियों द्वारा किए जाने वाले किसी भी अवांछित व्यवहार के खिलाफ कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
शिकायत दर्ज कराने के आधुनिक माध्यम अभियान के दौरान महिलाओं को प्रेरित किया गया कि वे उत्पीड़न को चुपचाप न सहें। शिकायत दर्ज करने के लिए अब कई प्रभावी मंच उपलब्ध हैं:
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शी-बॉक्स (She-Box): एक ऑनलाइन पोर्टल जहाँ सीधे शिकायत की जा सकती है।
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स्थानीय और आंतरिक शिकायत समिति: सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों में गठित विशेष समितियाँ।
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महिला आयोग: राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग की वेबसाइट के माध्यम से।
सामुदायिक सशक्तिकरण और सरकारी योजनाएँ कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रबंधक सिओन किंगोरी के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों ने बताया कि अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग या अश्लील साहित्य दिखाना कानूनी अपराध है। सामुदायिक प्रशिक्षक जगदीश जाट ने न केवल उत्पीड़न के खिलाफ बोलने की सलाह दी, बल्कि बच्चों की शिक्षा और सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने पर भी जोर दिया।
इस दौरान आवास प्रभारी देवीशंकर और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। शिविर में समुदाय की समस्याओं को भी चिन्हित किया गया, ताकि जिला प्रशासन के सहयोग से उनका समयबद्ध समाधान निकाला जा सके।
निष्कर्ष इस तरह के राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियानों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं में वह आत्मविश्वास पैदा करना है जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में सम्मानजनक और निडर होकर काम कर सकें। जब महिला श्रमिक जागरूक होगी, तभी समाज और राष्ट्र की प्रगति संभव है।
Disclaimer: यह लेख सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पोश अधिनियम (2013) के विस्तृत कानूनी प्रावधानों के लिए संबंधित सरकारी गजट या कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लें।
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