राजस्थान आबकारी विभाग का कड़ा प्रहार: अवैध शराब के विरुद्ध विशेष अभियान में 5 लाख लीटर से अधिक वॉश नष्ट
जयपुर, राजस्थान:
प्रदेश में अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग द्वारा संचालित 'विशेष निरोधात्मक अभियान' निरंतर जारी है। आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशन में, विभाग ने 'जीरो टोलरेंस' की नीति अपनाते हुए एक महीने से भी कम समय में बड़ी कार्रवाई की है।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ (1 मई से 25 मई 2026 तक)
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में अवैध शराब माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की गई है:
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कुल अभियोग: 1,923 मामले दर्ज किए गए हैं।
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गिरफ्तारियाँ: इस दौरान कुल 843 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
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वाश का विनाश: अवैध शराब बनाने के काम आने वाला 5 लाख 13 हजार 584 लीटर वॉश मौके पर ही नष्ट किया गया है।
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वाहन जब्ती: अवैध शराब परिवहन में प्रयुक्त 84 वाहनों (7 बड़े वाहन, 12 हल्के चार पहिया वाहन, 1 तिपहिया और 64 दुपहिया वाहन) को जब्त किया गया है।
जब्त की गई मदिरा का विवरण
विभाग ने अवैध रूप से जमा की गई भारी मात्रा में शराब और स्प्रिट जब्त की है:
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विदेशी मदिरा (IMFL): 38,875 लीटर (लागत: ~3.89 करोड़ रुपये)।
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बीयर: 19,618 लीटर (लागत: ~44.11 लाख रुपये)।
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देशी मदिरा: 6,810 लीटर (लागत: ~18.36 लाख रुपये)।
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हथकड़ शराब: 12,729 लीटर।
क्षेत्रीय कार्रवाई और निरंतर गश्त
आबकारी निरोधक दलों (EPF) द्वारा पूरे प्रदेश में सघन नाकाबंदी और दबिश दी जा रही है:
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हनुमानगढ़: नुवा मक्कासर नहर, सुरेवाल और पन्नीवाली क्षेत्रों में 2,000 लीटर वॉश नष्ट किया गया।
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जयपुर ग्रामीण: बस्सी, अखेपुरा, त्रिलोकपुरा और साख का गुढ़ा जैसे क्षेत्रों में 1,500 लीटर वॉश के साथ 2 अवैध भट्टियां नष्ट की गईं और 70 लीटर हथकड़ शराब जब्त की गई।
विभाग की कार्ययोजना
आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के समस्त जोन और जिलों में अतिरिक्त आबकारी आयुक्तों, उपायुक्तों और निरीक्षकों को अवैध शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि अवैध शराब के तंत्र को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर दिया जाता।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट आबकारी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। यदि आप अपने क्षेत्र में अवैध मदिरा निर्माण या बिक्री से संबंधित कोई गतिविधि देखते हैं, तो इसकी सूचना तुरंत अपने निकटतम आबकारी कार्यालय या जिला प्रशासन को दें।
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