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राजस्थान

राजस्थान: जर्जर आंगनबाड़ियां बनेंगी 'स्मार्ट प्ले स्कूल', CSR फंड और LGSF तकनीक से 15 दिन में तैयार होंगे हाईटेक भवन

राजस्थान सरकार CSR फंड के सहयोग से जर्जर और किराये की आंगनबाड़ियों को 'स्मार्ट प्ले स्कूल' में बदलेगी। जयपुर में डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने LGSF तकनीक से 15-21 दिनों में भवन निर्माण का खाका पेश किया।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 19 Jun 2026 👁️ 8 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
राजस्थान: जर्जर आंगनबाड़ियां बनेंगी 'स्मार्ट प्ले स्कूल', CSR फंड और LGSF तकनीक से 15 दिन में तैयार होंगे हाईटेक भवन

जयपुर। राजस्थान में अब जर्जर और किराये के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर पूरी तरह से बदलने वाली है। राज्य सरकार इन केंद्रों को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के जरिए 'स्मार्ट प्ले स्कूल' में अपग्रेड करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल को लेकर शुक्रवार, 19 जून 2026 को जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में एक अहम कार्यशाला का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित 'स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र अवसंरचना पहल' में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने शिरकत की।

इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य 'मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0' के तहत कॉर्पोरेट जगत का सहयोग जुटाना था। सरकार की योजना है कि बच्चों को बेहतर शाला पूर्व (प्री-स्कूल) शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निजी कंपनियों के साथ मिलकर आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाए।

LGSF तकनीक: 15 से 21 दिन में बनेंगे भूकंपरोधी भवन

कार्यशाला में आईसीडीएस (ICDS) के निदेशक वासुदेव मालावत ने प्रदेश की जमीनी हकीकत बताते हुए आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्य के कुल 63,000 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 3,284 बेहद जर्जर या क्षतिग्रस्त इमारतों में चल रहे हैं। इसके अलावा 11,488 केंद्र किराये या अस्थाई परिसरों में संचालित हो रहे हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए लाइट गेज स्टील फ्रेम (LGSF) तकनीक और प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इस आधुनिक तकनीक से महज 15 से 21 दिनों के भीतर सोलर पैनल युक्त और भूकंपरोधी 'कंटेनर आंगनबाड़ी भवन' तैयार किए जा सकेंगे।

'स्मार्ट प्ले स्कूल' स्वस्थ राजस्थान की नींव: दीया कुमारी

उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' विजन को साकार करने के लिए गरीब परिवारों के बच्चों को भी सशक्त बनाना अनिवार्य है। मजबूत मानव संसाधन से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कॉर्पोरेट भागीदारों से अपील की कि वे शहरी और अर्ध-शहरी औद्योगिक क्षेत्रों में इन आधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दें।

गुजरात के सफल सीएसआर मॉडल का हवाला देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य जर्जर आंगनबाड़ियों को पूरी तरह से 'स्मार्ट प्ले स्कूल' में तब्दील करना है, जो एक स्वस्थ और सशक्त राजस्थान की नींव बनेंगे।

पारदर्शिता के लिए 'पंखुड़ी पोर्टल' और कॉर्पोरेट का सहयोग

योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 8 जनवरी 2026 को भारत सरकार द्वारा लॉन्च किए गए 'पंखुड़ी पोर्टल' के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। यह एकीकृत डिजिटल मंच स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बिना नकद (नॉन-कैश) के पारदर्शी सीएसआर योगदान को सक्षम बनाता है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कॉर्पोरेट जगत से आह्वान किया कि वे बच्चों के लिए फर्नीचर, खिलौने, यूनिफॉर्म, शिक्षण सामग्री और पोषण वाटिका के निर्माण में अपना योगदान देकर देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करें।

इस महत्वपूर्ण ओपन हाउस चर्चा में महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित वेदांता, अडानी ग्रुप, टाटा स्टील, वंडर ग्रुप, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, हिन्दुस्तान जिंक, एचपी, डेल और एनपीसीआईएल (NPCIL) जैसी प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनियों, पीएसयू और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और केस स्टडी साझा किए।

निष्कर्ष

राजस्थान सरकार और कॉर्पोरेट जगत की यह साझा पहल प्रदेश के नौनिहालों के लिए एक सुरक्षित, आधुनिक और शैक्षिक माहौल तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सीएसआर फंड के सही उपयोग से न केवल आधारभूत ढांचे का विकास होगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास को भी एक नई दिशा मिलेगी।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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