राजस्थान पुलिस का विशेष अभियान: सड़कों पर नियम तोड़ने वालों पर 'वज्रप्रहार', एक ही दिन में 7,700 से अधिक वाहनों पर बड़ी कार्रवाई
जयपुर। राजस्थान में सड़क परिवहन को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए राजस्थान पुलिस इन दिनों बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों को कड़ा सबक सिखाने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में एक विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस का भारी अमला सड़कों पर उतरा हुआ है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है।
यह विशेष अभियान महानिदेशक पुलिस (DGP) श्री राजीव कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशों पर आयोजित किया जा रहा है। इसकी कमान महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण एवं यातायात) अनिल पालीवाल और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) डॉ. बी.एल. मीणा के हाथों में है, जो कानून व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए इस पूरे अभियान का कड़ा पर्यवेक्षण (Supervision) कर रहे हैं। पूरे राज्य में यह सघन चेकिंग अभियान 1 जून से शुरू हुआ है जो 30 जून 2026 तक निरंतर जारी रहेगा।
सड़क सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है यह 'वज्रप्रहार'?
यातायात पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार, वाहनों में अवैध रूप से किए गए बदलाव न केवल दुर्घटनाओं का सबब बनते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती खड़े करते हैं। उदाहरण के लिए, कारों के शीशों पर लगी काली फिल्म (Black Film) अपराधियों को छिपने और अनैतिक गतिविधियों को अंजाम देने का अवसर देती है। वहीं, बिना अनुमति के लगाए गए लाल-नीली बत्ती, अवैध हूटर और तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न ध्वनि प्रदूषण फैलाने के साथ-साथ आम राहगीरों में अनावश्यक भय और भ्रम पैदा करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने इस बार चौतरफा घेराबंदी की है।
आंकड़ों की जुबानी: महज 24 घंटे में 7,721 वाहनों पर गिरी गाज
इस विशेष अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार, 14 जून को एक ही दिन के भीतर पूरे राजस्थान में 7,721 वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कार्रवाई का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार रहा:
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काली फिल्म (Black Film): सबसे बड़ी कार्रवाई उन वाहनों पर हुई जो शीशों पर प्रतिबंधित काली फिल्म लगाकर घूम रहे थे। ऐसे 2,853 वाहनों के चालान काटे गए और मौके पर ही फिल्में हटवाई गईं।
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नियम विरुद्ध नंबर प्लेट: जिन वाहनों पर निर्धारित मानकों के अनुसार नंबर प्लेट नहीं लगी थीं या जिन पर स्पष्ट नंबर दर्ज नहीं थे, ऐसे 1,989 वाहनों पर कार्रवाई की गई।
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अनधिकृत शब्द और चिन्ह: नंबर प्लेट या वाहन की बॉडी पर गैर-कानूनी तरीके से पद, जाति, या अन्य अनधिकृत शब्द प्रदर्शित करने वाले 1,041 वाहनों को लपेटे में लिया गया।
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अवैध मॉडिफिकेशन (Structural Changes): वाहनों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर साइलेंसर बदलने या अन्य अवैध बदलाव करने वाले 726 वाहन पकड़े गए।
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अवैध बत्ती और हूटर: वीआईपी कल्चर को हवा देने वाले और बिना अनुमति के लाल-नीली बत्ती या हूटर लगाने वाले 674 वाहनों पर कार्रवाई की गई।
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प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न: सड़कों पर कानफोड़ू आवाज निकालने वाले 438 वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।
कार्रवाई में कोटा शहर रहा अव्वल, जयपुर-अलवर भी पीछे नहीं
प्रदेशव्यापी स्तर पर चल रही इस कार्रवाई में कोटा शहर सबसे आगे रहा, जहां अकेले रविवार को यातायात नियमों के उल्लंघन के 406 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद अन्य जिलों की स्थिति इस प्रकार रही:
इन आंकड़ों से साफ है कि राजस्थान के छोटे-बड़े सभी जिलों में पुलिस प्रशासन इस समय पूरी तरह मुस्तैद है।
प्रशासन की आमजन से अपील: सुरक्षा में ही समझदारी है
डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में कमी लाना और एक सुरक्षित यातायात संस्कृति (Safe Traffic Culture) का निर्माण करना है।
उन्होंने राजस्थान के सभी नागरिकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने वाहनों में किसी भी तरह के अवैध संशोधन, प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म या अनधिकृत हूटर का इस्तेमाल कतई न करें। यातायात नियमों का ईमानदारी से पालन करना न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि यह स्वयं वाहन चालक और सड़क पर चलने वाले अन्य निर्दोष लोगों की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। पुलिस का यह अभियान आने वाले दिनों में और सख्त हो सकता है, इसलिए नियमों के दायरे में रहकर वाहन चलाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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