मनरेगा की जगह 1 जुलाई से लागू होगी नई 'वीबी-जीरामजी' योजना: अब 125 दिन का रोजगार और हर हफ्ते मिलेगी मजदूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रामीण विकास और गरीब कल्याण के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 1 जुलाई 2026 से देशभर में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जीरामजी (VB-GRAMG) योजना लागू की जाएगी। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर, पारदर्शी और सशक्त बनाना है।
इस खबर की मुख्य बातें
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1 जुलाई 2026 से देश भर में मनरेगा को रिप्लेस करेगी नई 'वीबी-जीरामजी' योजना।
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ग्रामीणों को अब 100 दिन के बजाय पूरे 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी।
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मजदूरी का भुगतान 15 दिन के बजाय अब हर सप्ताह सीधे बैंक खाते (DBT) में होगा।
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राजस्थान को ग्रामीण रोजगार के सुदृढ़ीकरण के लिए 11,581 करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक बजट आवंटित।
राजस्थान के लिए जारी हुआ रिकॉर्ड बजट
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना हेतु 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट पारित किया है। राज्यों की हिस्सेदारी को मिला लें तो यह आंकड़ा 1.51 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। बात करें राजस्थान की, तो राज्य को केंद्र की ओर से 7,581 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार अपनी ओर से 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मुहैय्या कराएगी, जिसे मांग बढ़ने पर और भी बढ़ाया जा सकेगा। इस प्रकार राजस्थान के ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए कुल 11,581 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा फंड उपलब्ध रहेगा।
बढ़ेंगे रोजगार के दिन, मजदूरी के लिए नहीं करना होगा इंतजार
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण श्रमिकों को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अकुशल शारीरिक श्रम करने वाले पात्र परिवारों के लिए रोजगार की सीमा 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, श्रमिकों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले जहां मजदूरी 15 दिन में मिलती थी, वहीं अब साप्ताहिक आधार पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बैंक या डाकघर खातों में पैसे भेजे जाएंगे।
काम न मिलने पर मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
इस नए अधिनियम में जवाबदेही और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। यदि किसी ग्रामीण को तय समय सीमा के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, मजदूरी के भुगतान में देरी होने पर हर्जाना देने का भी सख्त कानूनी प्रावधान किया गया है। विभिन्न विभागों की योजनाओं को आपस में जोड़कर (कन्वर्जेन्स) काम की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
पुराने जॉब कार्ड का क्या होगा?
ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिन पुराने मनरेगा जॉब कार्ड्स की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे वीबी-जीरामजी अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार तब तक पूरी तरह मान्य रहेंगे, जब तक कि सरकार नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं कर देती। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार इस क्रांतिकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे।
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