CM भजनलाल शर्मा का बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 19 विभागीय मामलों का किया निपटारा, दागी अधिकारियों की पेंशन और वेतन वृद्धि रोकने के सख्त आदेश
जयपुर: राजस्थान में प्रशासनिक जवाबदेही, अनुशासन और कार्यशैली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कड़ा कदम उठाया है। बुधवार को मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित 19 विभागीय जांच (Departmental Inquiry) प्रकरणों का एकमुश्त निस्तारण कर दिया। अपने कर्तव्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने वाले सेवारत और रिटायर्ड दोनों ही तरह के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सरकार ने उनकी पेंशन और सालाना वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगा दी है।
इस खबर की मुख्य बातें:
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कड़ा प्रहार: सीएम भजनलाल शर्मा ने कुल 19 पेंडिंग विभागीय जांच मामलों पर अंतिम फैसला सुनाया है।
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इंक्रीमेंट पर रोक: सेवा नियमों के उल्लंघन पर 4 मौजूदा अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए गए हैं।
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पेंशन में कटौती: 7 मामलों में दोषी पाए गए 8 सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारियों की अनुपातिक पेंशन रोक दी गई है।
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निर्दोषों को राहत: आरोप सिद्ध न हो पाने के कारण 1 आईएफएस (IFS) समेत 5 अधिकारियों को दोषमुक्त कर बड़ी राहत दी गई है।
सेवारत और रिटायर्ड दोनों अधिकारियों पर चला चाबुक
प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राज्य सरकार ने कड़े फैसले लिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत जांच का सामना कर रहे राज्य सेवा के चार मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर सख्त रुख अपनाया है। दंडात्मक कार्रवाई के तहत इन सभी की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गई है।
सरकार का यह एक्शन केवल सेवारत कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहा। सीएम ने 7 अलग-अलग मामलों में नियम 16 सीसीए के तहत जांच में दोषी पाए गए 8 सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की है। इन सभी दागी रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन में से समानुपातिक कटौती करने (पेंशन रोकने) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
पुनरावलोकन याचिकाओं पर सीएम का फैसला
विभागीय कार्रवाई के खिलाफ अधिकारियों द्वारा लगाई गई पुनरावलोकन याचिकाओं (Review Petitions) पर भी मुख्यमंत्री ने अपना स्पष्ट निर्णय सुनाया है। सीएम शर्मा ने चार मामलों की विस्तार से समीक्षा करने के बाद पूर्व में दी गई सजा को बिल्कुल सटीक माना और उसे यथावत रखा। हालांकि, एक अन्य प्रकरण में तथ्यों के आधार पर सजा को थोड़ा सीमित करते हुए उसमें संशोधन किया गया है।
बेकसूर अधिकारियों को न्याय, 5 को किया दोषमुक्त
जहां एक तरफ लापरवाही पर कड़ा एक्शन लिया गया, वहीं जिन अधिकारियों पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके, उन्हें सरकार ने ससम्मान दोषमुक्त भी किया है। मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा (IFS) के एक अधिकारी को राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई को लिखित जवाब के स्तर पर ही खारिज कर दिया। इसके अतिरिक्त, दो अन्य मामलों में भी साक्ष्यों के अभाव और आरोप प्रमाणित न होने पर चार अन्य अधिकारियों को क्लीन चिट देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय का मानना है कि इन कड़े और निष्पक्ष निर्णयों से राज्य के समूचे प्रशासनिक तंत्र में एक कड़ा संदेश जाएगा, जिससे भविष्य में सरकारी कामकाज में दक्षता और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
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