PM कुसुम योजना: सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए बैंक बिना देरी के मंजूर करें लोन, जुलाई से राजस्थान में लगेंगे जोनल शिविर
जयपुर: राजस्थान में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। डिस्कॉम्स की चेयरमैन और जयपुर विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक (MD) सुश्री आरती डोगरा ने बुधवार को विद्युत भवन में सोलर पावर डेवलपर्स और विभिन्न बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए ऋण (लोन) मिलने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना था, ताकि पात्र डेवलपर्स को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
इस खबर की मुख्य बातें:
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लोन प्रक्रिया होगी आसान: डिस्कॉम्स चेयरमैन ने बैंकों से अनावश्यक कागजी देरी से बचने और ऋण नियमों में व्यावहारिक लचीलापन लाने का आग्रह किया है।
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जुलाई से लगेंगे जोनल शिविर: लोन आवेदनों के त्वरित निस्तारण के लिए जुलाई 2026 से हर महीने जोनल स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
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सौर ऊर्जा में राजस्थान अव्वल: प्रदेश में अब तक कुसुम योजना के कंपोनेंट-ए और सी के तहत 4,468 मेगावाट क्षमता के 2,034 सोलर प्लांट सफलतापूर्वक स्थापित हो चुके हैं।
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समस्याओं का होगा ऑन-स्पॉट समाधान: इन शिविरों में बैंक प्रतिनिधि, डेवलपर्स और डिस्कॉम अधिकारी एक साथ बैठकर लंबित लोन फाइलों का निपटारा करेंगे।
हरित ऊर्जा और किसानों की आत्मनिर्भरता पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए चेयरमैन डिस्कॉम्स सुश्री आरती डोगरा ने कहा कि पीएम-कुसुम केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय स्तर की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य ध्येय कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा (Green Energy) के उपयोग को बढ़ावा देना और देश के अन्नदाताओं को बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर हासिल करने में देश के बैंकिंग संस्थानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
जटिलताओं को कम कर ऋण प्रक्रिया को सुगम बनाएं बैंक
सुश्री डोगरा ने बैंक प्रतिनिधियों से सोलर पावर डेवलपर्स के लोन आवेदनों के प्रति सकारात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक अपनी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं अवश्य पूरी करें, लेकिन पात्र आवेदकों को जटिल प्रक्रियाओं के जाल में उलझाकर ऋण आवंटन में बेवजह की देरी न की जाए। वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था को जितना संभव हो सके त्वरित और सुगम बनाया जाना चाहिए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर प्लांट्स लगाने की गति और तेज हो सके।
डेवलपर्स और बैंकों ने रखी अपनी व्यावहारिक समस्याएं
इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान सोलर डेवलपर्स ने बैंकों के सामने आने वाली कई जमीनी समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कोलैटरल सिक्योरिटी (जमानत), लीज रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), खाता विभाजन और राइट ऑफ वे (रास्ता अधिकार) जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण लोन पास होने में लंबा समय लग जाता है।
दूसरी ओर, बैंकिंग प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कई मामलों में डेवलपर्स की ओर से भी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं समय पर पूरी नहीं की जातीं, जिसके कारण ऋण स्वीकृति में स्वाभाविक रूप से देरी होती है। इस पर डिस्कॉम्स चेयरमैन ने बैंकों से योजना के विशेष मॉडल को समझते हुए शर्तों में लचीलापन लाने को कहा, जिस पर बैंक अधिकारियों ने लंबित आवेदनों को प्राथमिकता से निपटाने का भरोसा दिया।
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