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करौली: 'वंदे गंगा अभियान' के तहत नए फार्म पौंड का शिलान्यास; आयोग अध्यक्ष ने प्रगतिशील किसानों को दिया जल संरक्षण का मंत्र

By Bhupendra Singh Sonwal 📅 01 Jun 2026 👁️ 5 Views ⏱️ 1 Min Read
करौली: 'वंदे गंगा अभियान' के तहत नए फार्म पौंड का शिलान्यास; आयोग अध्यक्ष ने प्रगतिशील किसानों को दिया जल संरक्षण का मंत्र

करौली, 1 जून 2026: जल संकट से निपटने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' को धरातल पर मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को राज्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास आयोग के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार नायक करौली दौरे पर रहे। उन्होंने जिला मुख्यालय के समीप स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), एकोरासी का सघन निरीक्षण किया और वहां जल संचय के एक बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत की।

फार्म पौंड का भूमि पूजन और शिलान्यास

खेतों में पानी की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग अध्यक्ष ने केवीके परिसर में एक नवीन फार्म पौंड (खेत तलाई) का पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। इस फार्म पौंड के बनने से न केवल केंद्र पर जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह स्थानीय किसानों के लिए एक बेहतरीन प्रदर्शन मॉडल (डेमो) के रूप में भी काम करेगा।

कृषक संवाद: "कम पानी, अधिक पैदावार" का लक्ष्य

भूमि पूजन के बाद कृषि विज्ञान केंद्र पर एक विशेष कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों को संबोधित करते हुए श्री राजेन्द्र कुमार नायक ने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। संवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • आधुनिक सिंचाई पद्धतियां: उन्होंने गिरते भू-जल स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से पारंपरिक खेती की जगह सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation), स्प्रिंकलर (फव्वारा पद्धति) और ड्रिप सिस्टम (टपक सिंचाई) जैसी तकनीकों को तेजी से अपनाने की अपील की ताकि कम पानी में अधिक फसल ली जा सके।

  • खेत तलाई की महत्ता: अध्यक्ष ने कहा कि आज के समय में पानी की हर बूंद को बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रत्येक खेत में एक फार्म पौंड का निर्माण आज की महती आवश्यकता बन चुका है।

  • प्राकृतिक एवं जैविक खेती: रासायनिक खादों के बढ़ते दुष्प्रभावों को कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए उन्होंने किसानों को जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने अंत में करौली के किसानों का आह्वान किया कि वे 'वंदे गंगा अभियान' में अपनी सक्रिय जन-भागीदारी निभाएं और वर्षा जल की एक-एक बूंद को सहेजने का संकल्प लें।


Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार लेख सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय, करौली (राजस्थान सरकार) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सरकारी अभियानों और कृषि संबंधी नवाचारों की जानकारी आम जनता तक सरल शब्दों में पहुंचाना है। योजना के तकनीकी मापदंडों और अनुदान संबंधी विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक सरकारी पोर्टल या नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करें।

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Author

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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