इटली के कैसिनो में गूँजी भारतीय वीर सपूत कैप्टेन कमलराम वीसी की शौर्य गाथा: प्रतिमा का भव्य अनावरण
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने अद्वितीय साहस और अदम्य वीरता का परिचय देने वाले भारत के महान योद्धा, कैप्टेन कमलराम वीसी को इटली की धरती पर एक भावपूर्ण और ऐतिहासिक सम्मान मिला है। इटली के ऐतिहासिक शहर कैसिनो में उनकी स्मृति में एक भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया, जो भारत और इटली के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों और भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक बन गई है।
वीरता को नमन: समारोह के मुख्य आकर्षण
इस गरिमामयी समारोह में भारत और इटली के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रतिमा का उद्घाटन किया। समारोह में भारत दूतावास रोम की चीफ श्रीमती वाणी राव, कैसिनो के मेयर डॉ. एंजो सलेरा, ब्रिगेडियर जनरल गेब्रियल कोसिमो गारौ और भारतीय दूतावास के डिफेंस अटैच कर्नल रोहन फ़ालनिकर ने शिरकत की।
प्रतिमा अनावरण के बाद, उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने चर्च और युद्ध स्मारकों का दौरा किया। इस दौरान कैप्टेन कमलराम वीसी की वीरगाथा को साझा किया गया। उनके साहसिक कार्यों का विवरण सुनकर समारोह में उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे।
परिवार की गौरवमयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर कैप्टेन कमलराम वीसी के सुपोत्र, वीसी प्रदीप गुर्जर और धर्मेंद्र सिंह विशेष रूप से इटली पहुंचे। कार्यक्रम में भारत दूतावास की ओर से उन्हें 'रोम किला' की स्मृति भेंट देकर सम्मानित किया गया।
प्रदीप गुर्जर ने अपने संबोधन में राजस्थान और पूरे भारत की ओर से इटली प्रशासन और भारतीय दूतावास का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी 105 वर्षीय दादी माँ, श्रीमती सूरजो देवी जी का भावुक उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दुआओं के कारण ही यह गौरवपूर्ण क्षण संभव हो सका है।
शौर्य को वैश्विक पहचान
समारोह के दौरान कैप्टेन कमलराम वीसी की दुर्लभ तस्वीरों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का एक एल्बम भी प्रदर्शित किया गया। श्रीमती वाणी राव ने इस एल्बम में गहरी रुचि दिखाई और कहा कि ऐसे महान वीरों के जीवन और उनके युद्धकालीन योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
अशोक गिलेरिया (सुजानगढ़) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने विदेश की धरती पर भारतीय आतिथ्य और संस्कृति की एक उत्कृष्ट मिसाल पेश की है।
एक आत्ममंथन का अवसर
यह प्रतिमा अनावरण जहाँ गर्व का क्षण है, वहीं यह देश के लिए आत्ममंथन का भी विषय है। इटली जैसे विदेशी देश द्वारा भारतीय नायक को इतना बड़ा सम्मान मिलना यह दर्शाता है कि वीरता की कोई सीमा नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी कैप्टेन कमलराम वीसी जैसे महान योद्धाओं को राष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान देना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके बलिदान से प्रेरित हो सकें।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और प्राप्त विवरणों पर आधारित है। इसका उद्देश्य महान वीरों के बलिदान और ऐतिहासिक घटनाओं को जनमानस तक पहुँचाना है। किसी भी ऐतिहासिक संदर्भ की सटीक पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों या सैन्य अभिलेखागारों का संदर्भ लें।
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