हिंडौन सिटी: रिहायशी इलाके से शराब का ठेका हटाने के लिए महिलाओं ने खोला मोर्चा, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
करौली, हिंडौन सिटी: समाज में जब भी परिवार की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य पर आंच आती है, तो महिलाएं सबसे पहले ढाल बनकर खड़ी होती हैं। राजस्थान के हिंडौन सिटी में भी कुछ ऐसा ही जमीनी नजारा देखने को मिला है। यहां जाटव बस्ती और वाल्मीकि बस्ती की आक्रोशित महिलाओं ने अपने इलाके से शराब की दुकान (Liquor Shop) को तुरंत हटाने की पुरजोर मांग उठाते हुए स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। घनी आबादी के बीच चल रहे इस मयखाने के कारण क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह बिगड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर सैकड़ों महिलाओं ने एकजुट होकर हिंडौन के उपखंड अधिकारी (SDM) हेमराज गुर्जर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है और साफ शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा जन-आंदोलन करेंगी।
क्या है पूरा मामला और क्यों पनपा आक्रोश?
हिंडौन सिटी के घनी आबादी वाले क्षेत्र, विशेषकर जाटव बस्ती और वाल्मीकि बस्ती के निवासियों का जीना इन दिनों मुहाल हो गया है। बस्ती के ही निकट एक नाले के पास संचालित हो रही शराब की दुकान पूरे मोहल्ले के लिए एक नासूर बन चुकी है। इस दुकान के कारण इलाके में दिन-भर और विशेषकर शाम ढलते ही शराबियों और असामाजिक तत्वों का भारी जमावड़ा लग जाता है। स्थिति यह है कि स्थानीय निवासियों का अपने घरों से शांतिपूर्वक बाहर निकलना भी दुश्वार हो गया है। महिलाओं के मन में हर वक्त असुरक्षा की भावना घर कर गई है और वे अपने ही मोहल्ले में खुद को असहज महसूस कर रही हैं। इसी गंभीर सामाजिक समस्या से निजात पाने के लिए क्षेत्र की महिलाओं ने लामबंद होकर उपखंड अधिकारी कार्यालय का रुख किया।
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर गहराता संकट
ज्ञापन देने पहुंची महिलाओं ने प्रशासन को अपनी दैनिक पीड़ा बताते हुए कहा कि शराब की दुकान के इर्द-गिर्द असामाजिक तत्वों का हर समय डेरा रहता है। नशे की हालत में ये लोग अक्सर राहगीरों, महिलाओं और युवतियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और उन पर छींटाकशी करने से भी बाज नहीं आते। महिलाओं का सीधा आरोप है कि इस ठेके की वजह से क्षेत्र की शांति भंग हो रही है और आपराधिक गतिविधियों का अंदेशा पल-पल बना रहता है। स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को इस मार्ग से गुजरने में भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। नशेड़ियों के बीच होने वाले आपसी झगड़े और गाली-गलौज के कारण बस्ती का माहौल पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है।
बच्चों के भविष्य और बुजुर्गों की शांति पर प्रहार
समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग, यानी बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह शराब की दुकान भारी परेशानी का सबब बनी हुई है। बुजुर्गों को जहां शाम के समय टहलने या घर के बाहर बैठने में दिक्कत होती है, वहीं छोटे बच्चों के सामने नशेड़ियों की अभद्रता एक बेहद गलत उदाहरण पेश कर रही है। महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि किसी भी कीमत पर वे अपने बच्चों का भविष्य इस नशे और अपराध के माहौल में बर्बाद नहीं होने देंगी। रिहायशी और घनी आबादी वाले इलाके में शराब की दुकान का संचालन न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का भी खुला हनन है।
प्रशासन को दो टूक चेतावनी - "कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चक्का जाम"
एसडीएम हेमराज गुर्जर को दिए गए इस ज्ञापन के माध्यम से मातृशक्ति ने प्रशासन को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है। महिलाओं ने मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए, महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए और सामाजिक हित को सर्वोपरि रखते हुए, इस शराब की दुकान का लाइसेंस इस स्थान से तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए या इसे शहर से बाहर किसी उपयुक्त गैर-आवासीय जगह पर स्थानांतरित (Shift) किया जाए। यदि प्रशासन इस दिशा में जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो इलाके की महिलाएं और नागरिक लामबंद होकर एक बड़ा, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण जन-आंदोलन करने के लिए विवश हो जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की होगी।
विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्र की मातृशक्ति ने भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इनमें मुख्य रूप से स्थानीय निवासी मीरा, शांति, केशर, मोहरवाई, सोनदेई, फूलवती, सरोज बाल्मीकि, सोनिया, महादेवी, कंचन, गंगा, सुमन, पिंकी, सावित्री और विमला समेत बस्ती के अनेक गणमान्य नागरिक शामिल थे। इन सभी ने एक स्वर में प्रशासन से जल्द से जल्द न्याय की गुहार लगाई है और इलाके में कानून-व्यवस्था व शांति बहाल करने की मांग की है।
आगे क्या? प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिंडौन सिटी का प्रशासन महिलाओं की इस जायज और गंभीर मांग पर कितनी त्वरित कार्रवाई करता है। एक तरफ जहां महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं जमीनी स्तर पर ऐसी रिहायशी कॉलोनियों में शराब की दुकानों का संचालन उन दावों की पोल खोलता है। क्षेत्र के लोगों की नजरें अब उपखंड अधिकारी हेमराज गुर्जर के अगले कदम पर टिकी हैं।
Disclaimer (अस्वीकरण):
यह समाचार लेख स्थानीय निवासियों और महिलाओं द्वारा उपखंड अधिकारी (SDM) को सौंपे गए ज्ञापन और जमीनी स्तर से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि समाज से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे और जनभावनाओं को जिम्मेदारों तक पहुंचाना है। हम पत्रकारिता के उच्च मानदंडों का पालन करते हुए सभी पक्षों का सम्मान करते हैं।
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