ईरान में 'EMI पर रोटी' का दावा: ईरानी दूतावास ने 'आज तक' की रिपोर्ट का किया कड़ा खंडन, जानें पूरा विवाद
नई दिल्ली: ईरान के भारत स्थित दूतावास ने भारतीय समाचार चैनल 'आज तक' (Aaj Tak) पर प्रसारित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान में गंभीर आर्थिक संकट के चलते लोग 'किस्तों (EMI) पर रोटी' खरीदने को मजबूर हैं। दूतावास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह से भ्रामक और वास्तविकता से परे बताया है।
यह विवाद मीडिया की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए स्रोतों के चयन को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
क्या था 'आज तक' का दावा?
आज तक के लोकप्रिय कार्यक्रम 'ब्लैक एंड व्हाइट' में एंकर अंजना ओम कश्यप ने 'ईरान इंटरनेशनल' (Iran International) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह खबर प्रसारित की थी। कार्यक्रम में दावा किया गया था कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक मंदी के कारण ईरान में खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो गई है, जिसकी वजह से आम जनता को दैनिक उपयोग की वस्तुएं, विशेषकर रोटी, किस्तों पर खरीदनी पड़ रही है।
ईरानी दूतावास का आधिकारिक पलटवार
11 जून को जारी अपने आधिकारिक बयान में, ईरानी दूतावास ने इन खबरों का कड़ा विरोध किया है। दूतावास की ओर से जारी बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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आपूर्ति सामान्य है: दूतावास ने स्पष्ट किया कि तीन युद्धों के प्रभाव और व्यापक अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, ईरान में आवश्यक वस्तुओं या बुनियादी जरूरतों की कोई कमी नहीं हुई है।
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सरकार का प्रभावी प्रबंधन: राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन के नेतृत्व वाली सरकार के प्रभावी प्रबंधन के कारण देश में आवश्यक वस्तुओं की खरीद, आपूर्ति और वितरण सामान्य और निर्बाध रूप से चल रहा है।
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'ईरान इंटरनेशनल' पर सवाल: दूतावास ने भारतीय मीडिया से आग्रह किया कि वे 'ईरान इंटरनेशनल' जैसे नेटवर्क पर भरोसा न करें। बयान में कहा गया है कि यह मीडिया आउटलेट ईरान के विरोधियों से जुड़ा है और ईरान विरोधी राजनीतिक एजेंडे के तहत पक्षपाती खबरें फैलाने का इसका लंबा इतिहास रहा है।
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in India categorically rejects the reports and claims circulated by certain media outlets regarding the economic situation in Iran and alleged difficulties in the supply of essential goods and public necessities.
— Iran in India (@Iran_in_India) June 11, 2026
It is emphasized that,… pic.twitter.com/KUoJ4xHOCg
ईरान की वास्तविक आर्थिक स्थिति (आंकड़ों की नजर में)
हालांकि ईरानी दूतावास ने कमी के दावों को नकारा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार ईरान वर्तमान में उच्च मुद्रास्फीति (Inflation) का सामना कर रहा है।
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मई महीने के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल मुद्रास्फीति दर 77.2 प्रतिशत रही।
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खाद्य पदार्थों की कीमतों में 113 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है, जिसके चलते कुछ इलाकों में जरूरी सामानों के लिए कतारें लगने की खबरें भी सामने आई थीं।
हालांकि, दूतावास का मानना है कि 'EMI पर रोटी' जैसा वाक्यांश स्थिति को अतिरंजित (exaggerated) और अपमानजनक तरीके से पेश करने का प्रयास है।
पत्रकारिता की नैतिकता पर उठे सवाल: मोहम्मद जुबैर की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक और फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पत्रकारिता के मानकों पर सवाल उठाते हुए 'आज तक' को आड़े हाथों लिया।
जुबैर ने लिखा:
"भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने अंजना ओम कश्यप और आज तक द्वारा ईरान के आर्थिक संकट के बारे में किए गए दावों की पोल खोल दी है। जब कोई आधिकारिक दूतावास सीधा खंडन जारी करता है, तो क्या दर्शकों को उस खंडन के बारे में नहीं बताया जाना चाहिए, या कम से कम कहानी के दोनों पहलू नहीं दिखाए जाने चाहिए?"
So @Iran_in_India Iran Embassy calls out claims aired by @anjanaomkashyap and @aajtak about the economic crisis in Iran.
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) June 11, 2026
When an official embassy issues a direct rebuttal, shouldn't viewers be told about the rebuttal or atleast both sides of the story? pic.twitter.com/TIdGFVghXd
निष्कर्ष
यह मामला अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी और प्रामाणिक स्रोतों (Verifiable Sources) के उपयोग के महत्व को रेखांकित करता है। एक ओर जहां आर्थिक आंकड़े ईरान में महंगाई की पुष्टि करते हैं, वहीं दूसरी ओर 'EMI पर रोटी' जैसे दावों का आधिकारिक रूप से खंडन किया गया है।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख उपलब्ध आधिकारिक बयानों, समाचार रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से साझा किए गए आंकड़ों के आधार पर निष्पक्ष रूप से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को घटना के दोनों पहलुओं से अवगत कराना है। किसी भी विदेशी राष्ट्र की आंतरिक स्थिति का आकलन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
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