राजस्थान पुलिस की बड़ी चेतावनी: AI डीपफेक और फर्जी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के जाल में न फंसें, ऐसे हो रही है करोड़ों की ठगी
जयपुर: क्या आप भी इंटरनेट पर ₹10,000 लगाकर रोज़ाना ₹5,000 कमाने वाले विज्ञापनों पर भरोसा कर रहे हैं? अगर हाँ, तो आपको तुरंत सावधान होने की आवश्यकता है। साइबर ठगों ने अब लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए एक विस्तृत साइबर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि लालच में आकर बिना सोचे-समझे किसी भी अनजान ऐप या प्लेटफॉर्म पर निवेश करना बड़े जोखिम का कारण बन सकता है।
सेलिब्रिटीज की फर्जी आवाज और वीडियो का खतरनाक खेल
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री वी. के. सिंह ने जानकारी दी कि आज-कल साइबर अपराधी बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर देश के नामचीन बिजनेस लीडर्स और शेयर बाजार के बड़े निवेशकों के डीपफेक वीडियो और क्लोन की गई आवाज का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन फर्जी वीडियो में यह मशहूर हस्तियां लोगों को किसी खास ऐप पर पैसे लगाने और कुछ ही दिनों में भारी मुनाफा कमाने का दावा करती हुई नजर आती हैं, जो कि पूरी तरह से भ्रामक और नकली होता है।
कैसे बिछाया जाता है ठगी का जाल?
साइबर ठग इस पूरे खेल को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम देते हैं:
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लुभावने विज्ञापन: ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम पर शेयर बाजार या ट्रेडिंग से जुड़े आकर्षक विज्ञापन चलाते हैं।
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फर्जी ग्रुप्स में एंट्री: विज्ञापन पर क्लिक करते ही पीड़ित को व्हाट्सएप या टेलीग्राम के "एलीट इंवेस्टमेंट ग्रुप" या "सुपर ट्रेडिंग क्लब" जैसे फर्जी ग्रुप्स में जोड़ लिया जाता है।
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बॉट्स और फर्जी स्क्रीनशॉट: इन ग्रुप्स में मौजूद ज्यादातर लोग असली नहीं होते, बल्कि ठगों के अपने अकाउंट या 'बॉट्स' होते हैं। ये बॉट्स लाखों रुपये के मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर करके नए व्यक्ति का भरोसा जीतते हैं।
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फर्जी ऐप डाउनलोड (APK): विश्वास जीतने के बाद पीड़ित को एक अज्ञात लिंक या APK फाइल भेजकर फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया जाता है।
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पैसे की निकासी पर रोक: ऐप के डैशबोर्ड पर पीड़ित को अपना निवेश और भारी मुनाफा दिखाई देता है। लेकिन जब वह पैसा निकालने की कोशिश करता है, तो ठग टैक्स, कमीशन या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और पैसे मांगते हैं और अंततः सारा पैसा लेकर गायब हो जाते हैं।
राजस्थान पुलिस की अहम सलाह: खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
साइबर सुरक्षा ही बचाव का सबसे बेहतरीन हथियार है। पुलिस ने आमजन से इन बातों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है:
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केवल आधिकारिक स्टोर का उपयोग: कोई भी ऐप केवल 'Google Play Store' या 'Apple App Store' से ही डाउनलोड करें। किसी अनजान लिंक या APK फाइल से ऐप बिल्कुल इंस्टॉल न करें।
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SEBI रजिस्ट्रेशन जांचें: किसी भी कंपनी या ब्रोकर को पैसे देने से पहले यह जरूर चेक करें कि वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास पंजीकृत है या नहीं।
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प्राइवेसी सेटिंग्स बदलें: अपने व्हाट्सएप और टेलीग्राम की ग्रुप प्राइवेसी सेटिंग को "My Contacts" (केवल मेरे संपर्क) पर सेट करें ताकि कोई अनजान व्यक्ति आपको किसी फालतू ग्रुप में न जोड़ सके।
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अज्ञात खातों में भुगतान नहीं: मुनाफे के लालच में किसी भी अनजान व्यक्ति के बैंक खाते या यूपीआई (UPI) आईडी पर पैसे ट्रांसफर करने से बचें।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत यहाँ करें शिकायत
अगर आपके या आपके किसी परिचित के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत एक्शन लें।
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राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
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राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें।
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इसके अलावा, आप राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार लेख राजस्थान पुलिस द्वारा जनहित में जारी आधिकारिक साइबर एडवाइजरी पर आधारित है। इसका प्राथमिक उद्देश्य साइबर सुरक्षा और बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के प्रति जागरूकता फैलाना है। किसी भी तरह का वित्तीय निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा करने से बचें।
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