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राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को मिली नई रफ्तार: 2.72 लाख करोड़ की 81 परियोजनाओं से बदल रही तस्वीर

By Jyoti Singh 📅 01 Jun 2026 👁️ 30 Views ⏱️ 1 Min Read
राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को मिली नई रफ्तार: 2.72 लाख करोड़ की 81 परियोजनाओं से बदल रही तस्वीर

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन और दूरदर्शी फैसलों का असर अब राजस्थान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर साफ नजर आने लगा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) की हालिया 'पैमाना' रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में रेलवे, सड़क, ऊर्जा, पेट्रोलियम और नागरिक उड्डयन जैसे अहम क्षेत्रों में विकास कार्यों ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। राज्य में फिलहाल 2.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कुल 81 बड़ी परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जो राजस्थान को एक आधुनिक और सुदृढ़ राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं।

आइए, इन प्रमुख परियोजनाओं पर विस्तार से नजर डालते हैं:

1. राजस्थान रिफाइनरी: पेट्रोलियम सेक्टर में बड़ी छलांग

बाड़मेर के पचपदरा में बन रही राजस्थान रिफाइनरी प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका जल्द ही उद्घाटन होने वाला है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत बन रही इस रिफाइनरी की लागत 79,459 करोड़ रुपये है। इससे न केवल राजस्थान बल्कि पूरे पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में बड़ा बदलाव आएगा। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। बाड़मेर में ही एचपीसीएल (HPCL) द्वारा 461 करोड़ रुपये की पेट्रोकेमिकल निकासी एवं विपणन टर्मिनल परियोजना पर भी काम चल रहा है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

2. ऊर्जा (Energy) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

राजस्थान में सौर और अन्य ऊर्जा स्रोतों की अपार संभावनाएं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक की एनर्जी ट्रांसमिशन की 19 परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें 25 हजार करोड़ रुपये की ‘राजस्थान पार्ट-1 पावर ट्रांसमिशन परियोजना’ शामिल है, जो राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई है।

3. रेलवे नेटवर्क का हो रहा है आधुनिकीकरण

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) के तहत 1 लाख 64 हजार 998 करोड़ रुपये की 23 परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स इस प्रकार हैं:

  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: देवगढ़ मदारिया से नाथद्वारा (968 करोड़), नाथद्वारा-नाथद्वारा टाउन (166 करोड़), पुष्कर-मेड़ता सिटी (799 करोड़), और पोकरण-रामदेवरा नई रेल लाइन (189 करोड़)।

  • अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स: 1,24,000 करोड़ रुपये की लागत वाला 'वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' अपने अंतिम चरण में है। साथ ही वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए 166 करोड़ का डिपो, अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण (1,634 करोड़), और सवाईमाधोपुर-जयपुर रेलवे लाइन (1,203 करोड़) जैसे काम भी तेजी से चल रहे हैं।

4. सड़कों और हाईवे का मजबूत जाल

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा NHAI मिलकर राजस्थान में 18 हजार करोड़ रुपये की 28 परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

  • लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लागत वाला दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट राजस्थान से गुजर रहा है।

  • NH-25 पर पचपदरा-बागुंडी का 4-लेन काम और अजमेर-जोधपुर हाईवे पर ब्यावर-गोमती 4-लेन का काम लगभग पूरा हो चुका है।

  • फतेहपुर, मंडावा और झुंझुनूं बाईपास (NH-11) भी 186 करोड़ की लागत से बनकर तैयार है।

5. हवाई उड़ानों के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) प्रदेश में 2,874 करोड़ रुपये की लागत से 3 अहम प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है:

  • बूंदी-कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: 1,507 करोड़ रुपये की इस परियोजना को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो हाड़ौती क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक होगा।

  • उदयपुर एयरपोर्ट: 887 करोड़ रुपये से एकीकृत टर्मिनल का काम चल रहा है (लक्ष्य: सितंबर 2026)।

  • जोधपुर एयरपोर्ट: 480 करोड़ रुपये की लागत से नया घरेलू यात्री टर्मिनल लगभग बनकर तैयार है।

निष्कर्ष के तौर पर, मंत्रालय की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इन 81 केंद्रीय परियोजनाओं के जरिए राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना रहा है।


Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 'पैमाना' रिपोर्ट और राजस्थान सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य आम जनता को राज्य में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देना है। परियोजनाओं की लागत और उनके पूरा होने की समयसीमा सरकारी आंकड़ों पर आधारित है, जिनमें भविष्य में बदलाव संभव है।

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Jyoti Singh

ज्योति सिंह एक कुशल पत्रकार, शोध विश्लेषक और प्रमुख डिजिटल समाचार मंच मिशन की आवाज़ की सह-संस्थापक हैं। अपने पति भूपेंद्र सिंह सोनवाल (संस्थापक और मुख्य संपादक) के साथ मिलकर काम करते हुए, ज्योति न केवल पर्दे के पीछे एक सहयोगी हैं, बल्कि मीडिया नेटवर्क के विकास की मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनकी जीवन कहानी उच्च जोखिम वाली खोजी पत्रकारिता और गहरे पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि एक साझा दृष्टिकोण स्वतंत्र क्षेत्रीय मीडिया में क्रांति ला सकता है।

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