बालश्रम और बाल विवाह पर करारा प्रहार: करौली के मासलपुर में 'बैक टू स्कूल' अभियान का शंखनाद, 677 ड्रॉपआउट बेटियों को मिलेगी नई उड़ान
मासलपुर (करौली): बचपन जिन हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, जब उन हाथों में काम का बोझ या कम उम्र में शादी की बेड़ियां पहना दी जाती हैं, तो एक पूरा भविष्य अंधकार में डूब जाता है। बाल अधिकारों के हनन की इन्ही सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाने के लिए करौली जिले के मासलपुर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। 'विश्व बालश्रम निषेध दिवस' के अवसर पर प्रशासन ने उन सैकड़ों बेटियों के लिए 'बैक टू स्कूल' (Back to School) अभियान का आगाज किया है, जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
यह विशेष महाभियान जिला प्रशासन और एक्शनएड एसोसिएशन-डीएमजी इवेंट्स की 'बाल विवाह रोकथाम एवं उन्मूलन परियोजना' के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किया गया है। अभियान का औपचारिक शुभारंभ मासलपुर पंचायत समिति सभागार में विकास अधिकारी (BDO) मोहनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुआ।
सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े: 595 बेटियों पर बाल विवाह का खतरा
इस अभियान की रूपरेखा हवा-हवाई नहीं है, बल्कि यह ग्राउंड जीरो पर किए गए एक विस्तृत संवेदनशीलता मानचित्रण (Vulnerability Mapping) पर आधारित है। कार्यक्रम के दौरान मासलपुर ब्लॉक की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई, जिसके आंकड़े हैरान करने वाले हैं:
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शामिल गांव: ब्लॉक के 30 गांवों में यह सर्वे किया गया।
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कुल परिवार: 5,063 परिवारों तक टीमें पहुंचीं।
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जोखिम वाले परिवार: इनमें से 3,074 परिवार ऐसे पाए गए जो सामाजिक और आर्थिक रूप से भारी जोखिम में जीवन यापन कर रहे हैं।
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ड्रॉपआउट व बाल विवाह: सबसे चिंताजनक आंकड़ा यह रहा कि इन गांवों में 677 बालिकाएं स्कूल छोड़ चुकी हैं (ड्रॉपआउट), जबकि 595 बालिकाओं पर बाल विवाह का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इन्हीं जमीनी हकीकतों को देखते हुए लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Intervention) की रणनीति तैयार की गई है।
क्या है 'बैक टू स्कूल' अभियान का मास्टरप्लान?
एक्शनएड एसोसिएशन के जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने इस मुहिम का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि यह अभियान मासलपुर और सपोटरा ब्लॉक में 12 जुलाई 2026 तक सघन रूप से चलाया जाएगा। इसका मुख्य फोकस बाल विवाह और बाल श्रम को रोकना है। इसके लिए ग्राम और वार्ड स्तर पर रैलियां निकाली जाएंगी, जनसंवाद होंगे, अभिभावकों से सीधा संपर्क किया जाएगा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनका दोबारा स्कूल में नामांकन (Enrollment) करवाया जाएगा।
अधिकारियों ने एक सुर में लिया बदलाव का संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए BDO मोहनलाल शर्मा ने दो टूक कहा कि बाल विवाह और बालश्रम सीधे तौर पर बच्चों के मौलिक अधिकारों की हत्या है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से इस मुहिम में आहुति देने की अपील की।
इस दौरान विभिन्न विभागों ने अपनी जिम्मदारियां और योजनाएं साझा कीं:
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शिक्षा विभाग: आरपी रविन्द्र रावत ने बताया कि विभाग ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उनकी निरंतर स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।
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महिला एवं बाल विकास: प्रतिनिधि अंतिमा शर्मा ने पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, पोषण सेवाओं और बच्चियों के समग्र विकास से जुड़ी विभागीय योजनाओं पर प्रकाश डाला।
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पुलिस प्रशासन: मासलपुर थाने के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी गजराज सिंह ने बाल संरक्षण कानूनों और सुरक्षा में पुलिस की मुस्तैदी का भरोसा दिलाया।
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विधिक सेवा एवं हेल्पलाइन: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पीएलवी राधारमण सारस्वत ने 'नालसा' के हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी दी, वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) के प्रभारी भीकम सिंह ने बच्चों के पुनर्वास के लिए उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जागरूक किया।
कार्यक्रम में ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका पर जोर दिया। इस मौके पर एक्शनएड के सामुदायिक प्रशिक्षक जगदीश जाट, ब्लॉक समन्वयक गौरव कुमारी और स्वयंसेवक रामराज गुर्जर सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने और उनके बचपन को सुरक्षित करने का संकल्प लिया।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार जिला प्रशासन और एक्शनएड एसोसिएशन द्वारा साझा की गई जानकारी और सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। हमारा उद्देश्य समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक बदलाव लाना और बाल अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
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