राजस्थान: 201 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट से जलदाय विभाग के बचेंगे 2300 करोड़ रुपये, 'वर्चुअल नेट मीटरिंग' से होगा कमाल
राजस्थान में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अब पूरी तरह से 'ग्रीन एनर्जी' से रोशन करने की बड़ी तैयारी हो चुकी है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के भारी-भरकम बिजली बिलों पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार 'वर्चुअल नेट मीटरिंग' (Virtual Net Metering) का एक अभिनव प्रयोग करने जा रही है। इस शानदार पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि आगामी 25 वर्षों में सरकारी खजाने के करीब 2,300 करोड़ रुपये की बंपर बचत होने का भी अनुमान लगाया गया है।
RREC ने जारी किया 201 मेगावाट का मेगा टेंडर राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को तेज रफ्तार देते हुए राज्य की नोडल एजेंसी 'राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड' (RREC) ने 201 मेगावाट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट के लिए निविदाएं (Tender) आमंत्रित की हैं। योजना के मुताबिक, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के आपूर्ति क्षेत्र में आने वाले विभिन्न 33/11 केवी सब-स्टेशनों के पास ये ग्रिड-कनेक्टेड और ग्राउंड-माउंटेड (जमीन पर स्थापित होने वाले) सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इससे जुड़ी आधिकारिक निविदा सूचना (RREC/TN-02/2026-27) 12 जून 2026 को जारी कर दी गई है।
क्या है 'वर्चुअल नेट मीटरिंग' का जादुई फॉर्मूला? सरल शब्दों में समझें तो 'वर्चुअल नेट मीटरिंग' एक ऐसी आधुनिक व्यवस्था है जिसमें सोलर प्लांट किसी एक जगह (खाली जमीन) पर लगाया जाता है, लेकिन वहां पैदा होने वाली बिजली को सीधे ग्रिड में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसके बदले में, अलग-अलग जगहों पर चल रहे सरकारी दफ्तरों या पंपिंग स्टेशनों (इस मामले में PHED के कनेक्शन) के बिजली बिलों में उस उत्पादित बिजली की यूनिट्स को एडजस्ट (समायोजित) कर दिया जाता है। यानी एक जगह बिजली बनेगी और उसका फायदा कई जगहों के बिल कम करने में मिलेगा। यह पूरी प्रक्रिया राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के 'ग्रिड इंटरएक्टिव डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटिंग सिस्टम्स (तृतीय संशोधन) विनियम, 2025' के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होगी।
सरकार की जेब से नहीं लगेगा एक भी पैसा (RESCO मॉडल) इस महात्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका 'रेस्को (RESCO) मॉडल' है। इसमें राज्य सरकार को अपनी तरफ से कोई भी शुरुआती पूंजी निवेश (Capital Expenditure) नहीं करना होगा। टेंडर के जरिए जो भी निजी सोलर कंपनियां (डेवलपर्स) चुनी जाएंगी, वे ही अगले 25 सालों तक इन प्लांट्स का डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और रखरखाव का जिम्मा संभालेंगी। सरकार केवल सस्ती दरों पर बिजली का लाभ उठाएगी।
टेंडर प्रक्रिया की अहम शर्तें:
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प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा: बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और ज्यादा डेवलपर्स हिस्सा ले सकें, इसके लिए एक बिडर (निविदाकर्ता) अधिकतम 50 मेगावाट क्षमता के लिए ही अपनी बोली लगा सकेगा।
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पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया: पूरी टेंडर प्रक्रिया राजस्थान राज्य ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए 'सिंगल-स्टेज, टू-पार्ट' (एकल चरणीय, द्वि-भागीय) सिस्टम पर आधारित होगी।
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टैरिफ आधारित चयन: कंपनियों का अंतिम चयन उनके द्वारा ऑफर किए गए 25 साल के 'लेवलाइज्ड टैरिफ' (रुपये प्रति यूनिट) के आधार पर किया जाएगा।
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आवेदन की अंतिम तारीख: इस आकर्षक प्रोजेक्ट में शामिल होने के इच्छुक निवेशक 14 जुलाई 2026 तक अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं।
इस योजना से संबंधित विस्तृत दस्तावेज, पात्रता मानदंड और कार्यक्षेत्र की पूरी जानकारी RREC की ऑफिशियल वेबसाइट और ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है।
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