दमोह अतिक्रमण अभियान: गरीबों की रोजी-रोटी पर चली जेसीबी, रसूखदारों के प्रतिष्ठानों पर मेहरबान प्रशासन
मध्य प्रदेश के दमोह स्थित हृदय स्थल 'घंटाघर' पर शुक्रवार को प्रशासन और नगर पालिका द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यातायात पुलिस और प्रशासनिक अमले की संयुक्त टीम ने कार्रवाई के नाम पर केवल गरीब फुटपाथ दुकानदारों और ठेले वालों को निशाना बनाया, जबकि बड़े और रसूखदार व्यापारियों के स्थायी कब्जों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस दोहरी नीति से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
इस खबर की मुख्य बातें:
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दमोह के घंटाघर क्षेत्र में नगर पालिका और यातायात पुलिस का अतिक्रमण विरोधी अभियान।
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पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन बेचने वाले गरीब कुंभकार (प्रजापति) परिवारों की आजीविका पर भारी संकट।
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बड़े व्यापारियों को कार्रवाई की पहले से थी भनक, अपना कीमती सामान बचाने में रहे कामयाब।
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आम जनता की मांग- अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के हो।
गरीबों पर गिरी गाज, छिन गया रोजगार
इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई का सबसे बड़ा खामियाजा कुंभकार (प्रजापति) समाज के लोगों को भुगतना पड़ा है। ये परिवार पीढ़ियों से सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचकर अपना जीवनयापन करते आ रहे हैं। बिना किसी ठोस पूर्व सूचना के प्रशासन ने उनके ठेले और सामान को तहस-नहस कर दिया। अचानक हुई इस सख्ती ने इन दिहाड़ी कमाने वालों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। शहर में अब यह चर्चा आम है कि क्या कानून का चाबुक सिर्फ कमजोर और गरीब वर्ग पर ही चलता है।
बड़े प्रतिष्ठानों के अतिक्रमण पर प्रशासन ने साधी चुप्पी
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि घंटाघर और उसके आसपास के इलाकों में कई बड़े दुकानदारों ने सार्वजनिक कॉरीडोर और रास्तों पर स्थायी कब्जा जमा रखा है। कई जगहों पर अवैध टीन शेड और पक्के निर्माण कर लिए गए हैं, लेकिन प्रशासन की जेसीबी वहां पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि रसूखदार और बड़े व्यापारियों को इस अतिक्रमण अभियान की सूचना पहले ही दे दी गई थी। इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने समय रहते अपना कीमती सामान सुरक्षित कर लिया। हालांकि, जब मौके पर मीडिया कवरेज शुरू हुई, तो अधिकारियों के रवैये में दिखावटी बदलाव जरूर नजर आया, लेकिन तब तक छोटे दुकानदारों का बड़ा नुकसान हो चुका था।
पारदर्शी कार्रवाई की उठ रही मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहरवासियों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। जनता का कहना है कि कानून की नजर में सभी समान हैं, इसलिए कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। सिर्फ शहर के गरीब तबके को निशाना बनाने के बजाय उन रसूखदारों पर भी बुलडोजर चलना चाहिए जिन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों पर पक्के कब्जे कर रखे हैं।
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