'अकबरनामा सच्चा इतिहास नहीं', हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पर बोले राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, शिल्प प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने रविवार, 14 जून 2026 को जयपुर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष 'शिल्प प्रदर्शनी' का भव्य उद्घाटन किया। प्रख्यात मूर्तिकार महावीर भारती द्वारा तैयार की गई इन ऐतिहासिक कलाकृतियों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने भारतीय इतिहास और मेवाड़ के अद्वितीय शौर्य को भावी पीढ़ियों के लिए सच्ची प्रेरणा बताया।
इस खबर की मुख्य बातें
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शिल्प प्रदर्शनी का आगाज: हल्दीघाटी विजय के 450 साल पूरे होने पर जयपुर में आयोजित हुई मूर्तिकला प्रदर्शनी।
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शौर्य को नमन: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने हाथी पर सवार महाराणा प्रताप और अन्य योद्धाओं की मूर्तियों का किया अवलोकन।
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इतिहास पर बेबाक राय: राज्यपाल ने 'अकबरनामा' को बताया दरबारी इतिहास, कहा- इसमें हमारे शूरवीरों का जिक्र नहीं।
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मेवाड़ का गौरव: बप्पा रावल और वीरांगना किरण कुमारी के अदम्य साहस को याद कर पुरानी पीढ़ियों के पराक्रम की सराहना की।
कलाकृतियों में जीवंत हुआ हल्दीघाटी का युद्ध
मूर्तिकार महावीर भारती की खास पहल पर सजी इस प्रदर्शनी में हल्दीघाटी युद्ध से जुड़ी घटनाओं और रणबांकुरों को मूर्तियों के जरिए शानदार ढंग से उकेरा गया है। राज्यपाल ने कलाकृतियों का बारीकी से मुआयना करते हुए कहा कि हल्दीघाटी के उस भीषण युद्ध में प्रताप तो डटे रहे, लेकिन अकबर कभी सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि हमारा महान इतिहास समाज को हमेशा नई ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।
अंग्रेजों और मुगलों ने इतिहास को धुंधला किया
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल श्री बागड़े ऐतिहासिक तथ्यों पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम बनाए जो हमें हमारी भारतीयता से दूर कर दें। वहीं, मुगलों के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने 'अकबरनामा' को महज एक 'दरबारी इतिहास' करार दिया। राज्यपाल ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसे दरबारी लेखनों में मेवाड़ के असली वीरों और वीरांगनाओं के शौर्य को जानबूझकर छिपाया गया है।
बप्पा रावल और रानी किरण कुमारी के पराक्रम की याद
मेवाड़ की शौर्य गाथाओं का उदाहरण देते हुए राज्यपाल ने बताया कि जब अरब आक्रमणकारी भारत की तरफ बढ़े, तो बप्पा रावल ने उन्हें खदेड़ते हुए भारत से बाहर कर दिया था। बप्पा रावल जिस स्थान पर रुके थे, वह जगह आज 'रावलपिंडी' के नाम से जानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने स्त्री सम्मान की रक्षा के लिए रानी किरण कुमारी द्वारा अकबर पर किए गए हमले का भी उल्लेख किया। राज्यपाल ने यह भी कहा कि यदि महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज का समय एक ही होता, तो देश की स्थितियां आज बहुत अलग होतीं।
देश-विदेश में लगी हैं प्रताप की 100 से अधिक मूर्तियां
इस खास अवसर पर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी और विधायक गोपाल शर्मा भी बतौर अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम में मूर्तिकार महावीर भारती ने अपने काम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे अब तक अपने स्तर पर देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में महाराणा प्रताप की 100 से ज्यादा प्रतिमाएं स्थापित कर चुके हैं।
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