🕒 14 June 2026, Sunday
देश

सुप्रीम कोर्ट सख्त: NCLT की बदहाली पर जताई चिंता, कहा—'युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत, वरना फेल हो जाएगा दिवाला कानून'

सुप्रीम कोर्ट ने NCLT की बदहाली पर जताई कड़ी नाराजगी। कोर्ट ने कहा- अगर बुनियादी ढांचे और मैनपावर की कमी दूर नहीं हुई, तो दिवाला कानून (IBC) का मकसद ही खत्म हो जाएगा।
द्वारा News Room 📅 30 Apr 2026 👁️ 39 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
सुप्रीम कोर्ट सख्त: NCLT की बदहाली पर जताई चिंता, कहा—'युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत, वरना फेल हो जाएगा दिवाला कानून'

नई दिल्ली | कानूनी डेस्क: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देश भर के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मौजूदा स्थिति को "गंभीर और निराशाजनक" करार दिया है। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों की कमी और मैनपावर जैसे मुद्दों को 'युद्ध स्तर' (War Footing) पर हल नहीं किया गया, तो इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

738 दिनों तक की देरी: आंकड़ों ने चौंकाया

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने दिल्ली स्थित NCLT प्रिंसिपल बेंच की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह टिप्पणी की। रिपोर्ट के अनुसार:

  • देश भर में 383 आवेदन लंबित हैं, जो केवल रेजोल्यूशन प्लान की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

  • इन मामलों में देरी 48 दिनों से लेकर 738 दिनों (2 साल से अधिक) तक की है।

  • कुछ विशेष मामलों में तो रेजोल्यूशन प्लान की मंजूरी में 4 साल तक का वक्त लग रहा है।

मैनपावर का गंभीर संकट

सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि NCLT में सदस्यों की भारी कमी है। स्वीकृत 63 सदस्यों की संख्या के मुकाबले केवल 54 सदस्य (28 न्यायिक और 26 तकनीकी) ही कार्यरत हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां कॉन्ट्रैक्ट (संविदा) के आधार पर की जा रही हैं, जो न्यायपालिका के कामकाज के लिए "अनसुना" है।

बुनियादी ढांचे और वेतन की समस्या

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ट्रिब्यूनल को कई बार केवल आधे दिन ही काम करना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बेंचों की सहायता करने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते नहीं मिल रहे हैं। कोर्ट ने सवाल किया, "क्या आप उम्मीद करते हैं कि ऐसे हालातों में कोई निर्णायक संस्था इतने महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा कर पाएगी?"

CJI को भेजा मामला: लिया गया 'Suo Motu' संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए ताकि इसे एक उचित बेंच को सौंपा जा सके और इन व्यवस्थागत खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।


Chief Editor की विशेष टिप्पणी:

NCLT का सुस्त पड़ना न केवल निवेशकों के भरोसे को तोड़ता है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को भी रोकता है। Mission Ki Awaaz का मानना है कि दिवाला कानून (IBC) की सफलता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूत बुनियादी ढांचे और नियुक्तियों से ही संभव है।

« पिछली ख़बर CG Board Toppers List 2026: CGBSE 10वीं, 12वीं टॉपर लिस्ट, न... अगली ख़बर » धुरंधर के बाद अब 'प्रलय' की तैयारी: ₹300 करोड़ के बजट वाली ज...
🏷️ Tags:
#Supreme Court on NCLT
Author
संपादक (Editor)

News Room

यह मिशन की आवाज का आधिकारिक समाचार कक्ष (News Room) है। यहाँ हमारी संपादकीय टीम राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, सरकारी योजनाओं तथा जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट प्रकाशित करती है।

मिशन की आवाज एक स्वतंत्र डिजिटल समाचार मंच है, जिसकी स्थापना 1 जनवरी 2021 को भूपेन्द्र सिंह सोनवाल द्वारा की गई थी। हमारा उद्देश्य सत्य, सरोकार और हाशिए की आवाज़ को प्रमुखता देना तथा पाठकों तक विश्वसनीय, निष्पक्ष और तथ्यपरक समाचार पहुँचाना है।

न्यूज़ रूम द्वारा प्रकाशित सामग्री संपादकीय समीक्षा, तथ्य-जांच (Fact-Checking) और पत्रकारिता के नैतिक मानकों के अनुरूप तैयार की जाती है। अधिक जानकारी के लिए पाठक हमारी Editorial Team, Fact Check Policy, Corrections Policy और Contact Us पेज देख सकते हैं।

टिप्पणियां (0)

अपनी राय दें

🔔

मिशन की आवाज़

ताज़ा ख़बरों और हर बड़ी अपडेट का अलर्ट सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए अपनी ईमेल डालें।

नहीं, धन्यवाद / स्किप करें