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Priti Paswan Video: भोजपुरी डांसर का 1 मिनट 48 सेकंड का कथित Video फर्जी; प्रीति पासवान ने रोते हुए बताई सच्चाई

द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 11 Jun 2026 👁️ 17 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
Priti Paswan Video: भोजपुरी डांसर का 1 मिनट 48 सेकंड का कथित Video फर्जी; प्रीति पासवान ने रोते हुए बताई सच्चाई

नई दिल्ली: हाल ही में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर 1 मिनट 48 सेकंड की एक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप तेजी से साझा की जा रही है। इस क्लिप को गलत तरीके से जानी-मानी भोजपुरी मंच कलाकार और डिजिटल क्रिएटर प्रीति पासवान से जोड़ा गया है। भ्रामक दावों के साथ प्रसारित की जा रही इस सामग्री की जब तकनीकी और तथ्यात्मक पड़ताल की गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी (Fabricated) और डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया हुआ (Morphed) है।

कलाकार ने स्वयं आगे आकर इन अफवाहों का खंडन किया है। इस घटना ने एक बार फिर इंटरनेट पर फैलने वाली भ्रामक जानकारी (Misinformation) और साइबर सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों को उजागर किया है।

तथ्यों की पड़ताल और कलाकार का आधिकारिक बयान

इंटरनेट पर किसी भी जानकारी को बिना पुष्टि के साझा करना डिजिटल छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद, प्रीति पासवान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से एक स्पष्टीकरण वीडियो जारी किया। उन्होंने शारीरिक साक्ष्यों के आधार पर इस फर्जी दावे को सिरे से खारिज कर दिया:

  • चेहरे की पहचान: प्रीति ने स्पष्ट किया कि उनके चेहरे पर प्राकृतिक रूप से एक स्पष्ट तिल (Mole) है, जो वीडियो में दिख रही अज्ञात महिला के चेहरे पर मौजूद नहीं है।

  • टैटू का साक्ष्य: कलाकार के कंधे पर एक विशिष्ट टैटू बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि विवादित क्लिप में नजर आ रही महिला के शरीर पर ऐसा कोई निशान नहीं है।

यह स्पष्ट है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने केवल इंटरनेट पर ट्रैफिक और फॉलोअर्स हासिल करने के दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से एक अज्ञात वीडियो को प्रीति पासवान के नाम से प्रचारित किया है। कलाकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

साइबर सुरक्षा चेतावनी: फिशिंग और मैलवेयर का खतरा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस घटना के बीच इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी (Advisory) जारी की है। जब भी किसी चर्चित व्यक्ति से जुड़ी कोई भ्रामक खबर ट्रेंड करती है, तो हैकर्स और साइबर अपराधी इसका फायदा उठाते हैं:

  • दुर्भावनापूर्ण लिंक्स (Phishing Links): सोशल मीडिया पर 'पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें' जैसे दावे अक्सर हैकर्स द्वारा बिछाया गया जाल होते हैं।

  • डेटा चोरी का जोखिम: इन असत्यापित लिंक्स पर क्लिक करने से आपके स्मार्टफोन या कंप्यूटर में मैलवेयर (Malware) और स्पायवेयर (Spyware) इंस्टॉल हो सकता है, जिससे आपके बैंक खाते और निजी पासवर्ड चोरी होने का खतरा रहता है।

  • बॉट नेटवर्क्स का उपयोग: विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के भ्रामक कीवर्ड्स को ट्रेंड कराने के लिए 'स्पैम बॉट्स' (Spam Bots) का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को फिशिंग लिंक्स का शिकार बनाया जा सके।

भ्रामक सामग्री साझा करने के कानूनी परिणाम

भारत में साइबर कानूनों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना या छेड़छाड़ की गई सामग्री (Deepfake/Morphed Media) को साझा करना एक गंभीर अपराध है।

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े प्रावधानों के तहत:

  • अश्लील या भ्रामक सामग्री का निर्माण करना, उसे डाउनलोड करना या आगे भेजना (Forward करना) दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

  • ऐसा करने वाले व्यक्तियों या समूहों को भारी विधिक जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है।

प्रशासन और साइबर सेल लगातार नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे ऐसी असत्यापित और भ्रामक जानकारी का हिस्सा न बनें और संदिग्ध लिंक्स की तुरंत रिपोर्ट करें।

Disclaimer (अस्वीकरण):

यह रिपोर्ट पूरी तरह से जन-जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और तथ्य-जांच (Fact-Checking) के उद्देश्य से तैयार की गई है। हमारा संस्थान किसी भी प्रकार की असत्यापित सामग्री, डीपफेक, या गैर-सहमति वाली छवियों (NCII) के वितरण का सख्त विरोध करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करें और भ्रामक लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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