हिंडौन सिटी/नादौती: 5 वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत पर बवाल, 36 घंटे से मोर्चरी में रखा शव, न्याय और गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन
Karauli: राजस्थान के हिंडौन सिटी और नादौती थाना क्षेत्र में इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और हृदयविदारक घटना को लेकर भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। एक 5 वर्षीय मासूम बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना को घटे हुए लगभग 36 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन और शोकाकुल परिवार के बीच अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इस दुखद घटना के बाद से मासूम का शव अभी भी हिंडौन के राजकीय जिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
परिजनों के गंभीर आरोप: इलाज में बरती गई भारी लापरवाही
इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार ने स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था और संबंधित व्यक्तियों पर घोर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, उनके 5 वर्षीय बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उसे तुरंत उपचार के लिए ले जाया गया था। लेकिन, वहां इलाज के दौरान उचित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और भारी लापरवाही बरती गई। परिवार का दृढ़ता से यह मानना है कि यदि समय रहते बच्चे को सही और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस कथित लापरवाही के कारण ही मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी। घटना के तुरंत बाद, आक्रोशित परिजनों ने नादौती पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ हत्या या गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मोर्चरी के बाहर पसरा मातम और न्याय के लिए अडिग परिवार
हिंडौन के राजकीय अस्पताल के बाहर का दृश्य बेहद मार्मिक है। एक तरफ जहां मासूम बच्चे को खोने का दर्द परिवार की आंखों से आंसू बनकर छलक रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की कथित संवेदनहीनता ने उनके भीतर भारी आक्रोश भर दिया है। 36 घंटे से अधिक समय तक मोर्चरी के बाहर इंतजार करना किसी भी परिवार के लिए एक भयानक मानसिक आघात से कम नहीं है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है कि जब तक पुलिस उनकी नामजद शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर लेती, तब तक वे अपनी जगह से नहीं हिलेंगे और न ही मासूम के शव का अंतिम संस्कार करेंगे। भारतीय समाज में अंतिम संस्कार का बहुत महत्व है, ऐसे में परिजनों का यह कठोर कदम उनके गहरे असंतोष और पुलिस प्रशासन से तत्काल न्याय की उम्मीद को दर्शाता है।
समाज और स्थानीय ग्रामीणों का मिला भारी समर्थन
पीड़ित परिवार की इस न्याय की लड़ाई में अब स्थानीय ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उतर आए हैं। मोर्चरी और अस्पताल परिसर के बाहर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो गए हैं, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। इस दौरान समाज के प्रमुख लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से समाज के प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत, तहसील अध्यक्ष बबलू चौरसिया, सतवीर सुमन, कमल मेहमदपुरिया सहित कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इन सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले में किसी भी प्रकार की टालमटोल करने के बजाय तुरंत निष्पक्ष जांच शुरू की जाए। ग्रामीणों ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने जल्द ही दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की, तो वे अपने इस विरोध को एक बड़े और उग्र जन आंदोलन में तब्दील करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और प्रशासन की होगी।
प्रशासन का रुख और पुलिस की जांच प्रक्रिया
लगातार बढ़ते दबाव और अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए नादौती थाना पुलिस और हिंडौन प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं। कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्पताल परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया है। वहीं, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और पीड़ित परिवार से समझाइश का प्रयास शुरू कर दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि परिजनों की ओर से दी गई शिकायत को पूरी गंभीरता से लिया गया है और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मासूम की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, और यदि जांच रिपोर्ट में कोई भी व्यक्ति या चिकित्सक दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
निष्कर्ष: संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता
यह मामला न केवल एक परिवार के गहरे दुख का है, बल्कि यह हमारी स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जवाबदेही पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी भी स्वस्थ और लोकतांत्रिक समाज में त्वरित न्याय और निष्पक्ष जांच ही वह अहम स्तंभ है, जिस पर आम जनता का विश्वास टिका होता है। 36 घंटे से शव का मोर्चरी में रखा होना प्रशासनिक संवेदनशीलता की मांग करता है। अब यह पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस संवेदनशील मामले में अपनी तत्परता दिखाए, पीड़ित परिवार को सांत्वना दे और उन्हें यह विश्वास दिलाए कि न्याय प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष है।
Disclaimer:
यह समाचार रिपोर्ट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं, ग्रामीणों के बयानों और प्राथमिक मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर जनहित व सूचना के उद्देश्य से संकलित की गई है। पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के नतीजों के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। हमारा उद्देश्य किसी भी संस्था या व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है।
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