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वैश्विक व्यापार युद्ध की आहट? ट्रंप ने यूरोपीय वाहनों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 25% किया; ट्रेड समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ से आयातित कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25% करने का एलान किया है। जानें इस फैसले का वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऑटो कंपनियों पर क्या असर होगा।
द्वारा News Room 📅 01 May 2026 👁️ 46 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
वैश्विक व्यापार युद्ध की आहट? ट्रंप ने यूरोपीय वाहनों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 25% किया; ट्रेड समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने कड़े व्यापारिक रुख से दुनिया को चौंका दिया है। शुक्रवार को एक बड़े एलान में ट्रंप ने घोषणा की कि अगले सप्ताह से यूरोपीय संघ (EU) से आयातित कारों और ट्रकों पर लगने वाला सीमा शुल्क (Tariff) बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।

ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यूरोपीय संघ पिछले व्यापारिक समझौतों का पालन करने में विफल रहा है, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।

फैसले के पीछे का तर्क और 'टर्नबेरी समझौता'

व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा रवाना होते समय एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ उस 'ट्रेड फ्रेमवर्क' का सम्मान नहीं कर रहा है, जिस पर पिछले साल सहमति बनी थी। इस समझौते को 'टर्नबेरी समझौता' (Turnberry Agreement) के नाम से जाना जाता है।

मुख्य बिंदु:

  • पिछले साल जुलाई में ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच 15% की टैरिफ सीमा (Tariff Ceiling) पर सहमति बनी थी।

  • हालांकि, हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने उन कानूनी शक्तियों को सीमित कर दिया है, जिनका उपयोग ट्रंप प्रशासन इन शुल्कों को लागू करने के लिए कर रहा था।

  • अब प्रशासन 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और 'व्यापार असंतुलन' का हवाला देकर नए सिरे से 25% शुल्क थोप रहा है।


यूरोपीय कार निर्माताओं पर पड़ेगा भारी बोझ

यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के साथ हुए इस द्विपक्षीय व्यापार सौदे से यूरोपीय कार निर्माताओं को हर महीने लगभग 500 से 600 मिलियन यूरो ($585 मिलियन से $700 मिलियन) की बचत होने की उम्मीद थी। 2024 में दोनों देशों के बीच माल और सेवाओं का व्यापार 1.7 ट्रिलियन यूरो तक पहुंच गया था।

अब 25% शुल्क लगने से Volkswagen, BMW, और Mercedes-Benz जैसे बड़े ब्रांड्स के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना बेहद महंगा हो जाएगा। ट्रंप का मानना है कि इस दबाव के चलते यूरोपीय कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को तेजी से अमेरिका में शिफ्ट करेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।

महंगाई और राजनीतिक दबाव

अमेरिका के भीतर भी यह फैसला दोधारी तलवार साबित हो सकता है। मार्च 2026 में अमेरिका में मुद्रास्फीति (Inflation) की दर 3.3% दर्ज की गई है, जो अनुमान से कहीं अधिक है। मिड-टर्म चुनावों (Mid-term Elections) से पहले ट्रंप पर महंगाई कम करने का भारी दबाव है। आलोचकों का तर्क है कि आयात शुल्क बढ़ने से कारों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई की आग और भड़क सकती है।

इसके अलावा, ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने पहले ही अमेरिकी जनता की जेब पर बोझ डाल रखा है। ताजा सर्वे के अनुसार, केवल 30% अमेरिकी वयस्क ही ट्रंप के आर्थिक प्रबंधन से संतुष्ट हैं।


यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया: "डील इज अ डील"

यूरोपीय आयोग ने ट्रंप के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि "सौदा तो सौदा होता है" (A deal is a deal)। आयोग ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को अपने वादों का सम्मान करना चाहिए और यूरोपीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बने रहने देना चाहिए। यूरोपीय व्यापार आयुक्त मारोस सेफ़ोविक ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका पीछे नहीं हटता, तो EU भी जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Tariffs) कर सकता है।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख हालिया आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार संधियां और टैरिफ दरें कानूनी प्रक्रियाओं और कूटनीतिक वार्ताओं के अधीन हैं, जिनमें भविष्य में बदलाव संभव है। निवेश या व्यापारिक निर्णय लेने से पहले संबंधित सरकारी विभागों या वित्तीय सलाहकारों की राय अवश्य लें। यह प्रकाशन किसी भी आर्थिक हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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