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स्टॉक मार्केट क्रैश: सेंसेक्स में 900 अंकों की भारी गिरावट, निफ्टी 23,900 के नीचे फिसला; ये 3 कारण पड़े बाजार पर भारी

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट देखी गई, जहां निफ्टी 23,900 के स्तर से नीचे फिसल गया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार का मूड बिगाड़ा। जानिए विस्तार से।
द्वारा News Room 📅 30 Apr 2026 👁️ 39 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
स्टॉक मार्केट क्रैश: सेंसेक्स में 900 अंकों की भारी गिरावट, निफ्टी 23,900 के नीचे फिसला; ये 3 कारण पड़े बाजार पर भारी

भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार की सुबह बेहद निराशाजनक रही। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने घरेलू निवेशकों के विश्वास को हिला कर रख दिया है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भारी बिकवाली के दबाव में खुले, जिससे बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) काफी कमजोर नजर आई।

बाजार का मौजूदा हाल: आंकड़ों की नजर से

गुरुवार सुबह 09:30 बजे के करीब बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:

  • S&P BSE Sensex: 937.57 अंक या 1.13% गिरकर 76,621.79 पर आ गया।

  • Nifty 50: 301.80 अंक या 1.25% की गिरावट के साथ 23,875.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

  • India VIX: बाजार में घबराहट को मापने वाला 'इंडिया विक्स' सूचकांक 5.04% उछलकर 18.32 पर पहुंच गया, जो निकट अवधि में भारी अस्थिरता का संकेत है।


गिरावट के पीछे के मुख्य कारण

बाजार में आई इस अचानक गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:

1. कच्चे तेल की कीमतों में उबाल ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $113 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) के लिहाज से एक बड़ा झटका है।

2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% की सीमा पर स्थिर रखा है। हालांकि, फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने चेतावनी दी है कि तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में मुद्रास्फीति (Inflation) को बढ़ा सकती हैं। 1992 के बाद पहली बार फेड कमेटी में चार सदस्यों ने नीतिगत फैसले पर असहमति जताई है।

3. संस्थागत निवेशकों की बिकवाली विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने बाजार से ₹2,468.42 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी की कोशिश की, लेकिन वे बाजार के भारी दबाव को संभालने में नाकाम रहे।


स्टॉक्स इन स्पॉटलाइट: कौन गिरा, कौन संभला?

बाजार की चौड़ाई काफी कमजोर रही, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक थी।

  • बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance): खराब बाजार के बावजूद, कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया। चौथी तिमाही के मुनाफे में 22% की बढ़ोतरी की खबर से शेयर 3.10% तक उछला

  • अडानी पावर (Adani Power): कंपनी ने अपने शुद्ध लाभ में 64.33% की भारी वृद्धि दर्ज की, जिससे शेयर में मामूली तेजी देखी गई।

  • फोर्स मोटर्स (Force Motors): मुनाफे में 36% की भारी गिरावट के कारण शेयर 3.63% टूट गया


निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

"जब बाजार में अस्थिरता (VIX) 18 के स्तर को पार कर जाए, तो यह 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाने का समय होता है। कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव बाजार की दिशा तय करेंगे।"

मुख्य बिंदु जिन पर नजर रखनी चाहिए:

  • रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 94.14 के स्तर पर आ गया है।

  • बॉन्ड यील्ड: भारत की 10 वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.064% हो गई है, जो बैंकिंग सेक्टर के लिए चिंता का विषय है।

निष्कर्ष: बाजार में वर्तमान में बिकवाली का दौर हावी है। ऑटो, रियल्टी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान दें और पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करें।


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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