करौली में संविदा कर्मियों का हल्ला बोल: 9 महीने से नहीं मिला वेतन, शहर में लगे गंदगी के ढेर, कलेक्ट्रेट तक निकाला पैदल मार्च
करौली: जो हाथ शहर को आग जैसी आपदाओं से बचाते हैं और सड़कों को साफ रखते हैं, वे आज खुद अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजस्थान के करौली जिला मुख्यालय पर पिछले 9 महीने से वेतन न मिलने के कारण अनुबंध (ठेका) पर काम कर रहे कर्मचारियों का सब्र आखिरकार टूट गया।
अग्निशमन कर्मियों, सफाई वाहन चालकों और रैन बसेरा के केयरटेकरों ने अपनी मांगों को लेकर अग्निशमन केंद्र से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इन कर्मचारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर संबंधित ठेकेदारों (संवेदकों) से तुरंत बकाया वेतन दिलाने की सख्त मांग की है।
आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारी, परिवार पालना हुआ मुश्किल
लंबे समय से मानदेय न मिलने के कारण इन संविदा कर्मियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का दर्द है कि वे पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदारों की घोर लापरवाही के चलते उन्हें कर्ज लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। भारी आर्थिक तंगी से परेशान होकर ही उन्हें मजबूरन सामूहिक रैली और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
इन तीन संवेदकों (Contractors) पर है वेतन रोकने का आरोप
कलेक्ट्रेट में सौंपे गए शिकायत पत्र और ज्ञापन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किन ठेकेदारों ने कितने महीनों से पैसा रोक रखा है:
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भगत कॉन्ट्रैक्टर (करौली): इस एजेंसी पर अक्टूबर 2024 तक का कुल 4 महीने का वेतन बकाया है।
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मैसर्स भारतीय ग्रामीण विकास सेवा संस्थान (धौलपुर): इस संस्थान ने जनवरी और फरवरी 2026 के 2 महीने का मानदेय अब तक नहीं दिया है।
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मैसर्स चौधरी कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स (दौसा): इस एजेंसी पर कर्मचारियों के 3 महीने के वेतन का भुगतान लंबित है।
हड़ताल का बुरा असर: चरमराई करौली शहर की सफाई व्यवस्था
सफाई वाहन चालकों और अन्य फील्ड कर्मचारियों के सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले जाने से करौली शहर की व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ा है। सबसे बुरा हाल सफाई व्यवस्था का है। शहर के विभिन्न इलाकों और कॉलोनियों में गंदगी के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं, जिनसे उठने वाली दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाया 9 माह के वेतन का शीघ्र भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और ठेकेदारों की होगी।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार लेख मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और स्थानीय रिपोर्टिंग से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। ठेकेदारों पर लगाए गए बकाया राशि के दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय जांच का विषय है। इसका उद्देश्य केवल जन-जागरूकता और निष्पक्ष सूचना प्रदान करना है।
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