लोक कलाओं को मिलेगी वैश्विक पहचान, रोजगार से जुड़ेंगे कलाकार: पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की बैठक में बड़ा फैसला
भारत की प्राचीन लोक कलाएं और सांस्कृतिक धरोहरें समय के आधुनिक पहिये के नीचे धीरे-धीरे अपनी चमक खो रही हैं। इन अमूल्य धरोहरों को सहेजने और हमारे पारंपरिक कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार, 13 जून 2026 को गोवा में एक अहम कदम उठाया गया।
गोवा में आयोजित 'पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र' (West Zone Cultural Centre) की शासी परिषद की विशेष बैठक में इस बात पर गहरा मंथन हुआ कि कैसे हमारी आंचलिक कलाओं को विश्व पटल पर स्थापित किया जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और गोवा के राज्यपाल श्री पुसापति अशोक गजपति राजू ने विशेष रूप से शिरकत की।
लुप्त होती कलाओं को बचाने की मुहिम
बैठक को संबोधित करते हुए राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने चिंता व्यक्त की और कहा कि आधुनिक कलाओं की नींव हमारी पारंपरिक लोक कलाएं ही हैं। उन्होंने विलुप्त हो रही दृश्य (Visual) और प्रदर्शन (Performing) कलाओं के संरक्षण के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उनका मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि संरक्षण के साथ-साथ इन कलाओं को आजीविका और रोजगार का एक ठोस माध्यम बनाया जाए।
बैठक के मुख्य दिशा-निर्देश
पारंपरिक कलाओं को बाजार और आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने के लिए राज्यपाल द्वारा कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश दिए गए:
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दस्तावेजीकरण (Documentation): राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और दमन-दीव जैसे राज्यों की समृद्ध आंचलिक कलाओं का उचित दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे वाकिफ रहें।
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ग्लोबल मार्केट तक पहुंच: हमारी पारंपरिक कलाकृतियों को केवल प्रदर्शनियों तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक परिधानों (Textiles), होम डेकोर और वैश्विक कला बाजार (Global Art Market) के अनुरूप ढाला जाए।
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विपणन (Marketing) और कौशल विकास: कलाकारों के उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग की जाए और कलात्मक बोध जगाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन बढ़ाया जाए जिससे कलाकारों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।
सांस्कृतिक केन्द्र की शानदार उपलब्धियां और बढ़ते कदम
इस दौरान पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई, जो कला के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान को दर्शाती है। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:
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1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच: केन्द्र द्वारा कुल 114 कोर-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया है।
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कलाकारों को लाभ: इन कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर के लगभग 5,961 कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने और आजीविका कमाने का अवसर मिला।
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शिल्पग्राम की बढ़ती लोकप्रियता: कला प्रेमियों के बीच शिल्पग्राम का आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां आने वाले पर्यटकों और कला प्रेमियों की संख्या में प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत का शानदार इजाफा दर्ज किया गया है।
राज्यपाल ने इस प्रगति की सराहना करते हुए जोर दिया कि केन्द्र अपनी नियमित गतिविधियों के साथ-साथ भारतीय कलाकारों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए भी एक ठोस रोडमैप तैयार करे।
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