राजस्थान में डेयरी सेक्टर का होगा कायाकल्प: दुग्ध समितियों का आवंटन अब ऑनलाइन, जयपुर-पाली सहित कई जिलों में शुरू होंगे नए प्लांट
जयपुर: राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी सेक्टर को अब पूरी तरह से पारदर्शी और हाईटेक बनाने की तैयारी कर ली गई है। राज्य के पशुपालकों की आय बढ़ाने और दुग्ध संकलन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई बड़े और रणनीतिक फैसले लिए हैं। इसके तहत अब दुग्ध सहकारी समितियों का आवंटन जहां ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये होगा, वहीं राज्य के कई जिलों में करोड़ों की लागत से तैयार नए प्रोसेसिंग और कैटल फीड (पशु आहार) प्लांट्स जल्द ही शुरू किए जाएंगे।
पशुपालन, गोपालन, डेयरी और देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने मंगलवार को शासन सचिवालय में डेयरी विभाग के कामकाज की एक अहम और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस अहम बैठक में राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक (MD) श्रुति भारद्वाज समेत विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
सिस्टम में पारदर्शिता: अब ऑनलाइन खुलेंगे संकलन केंद्र
डेयरी नेटवर्क में भाई-भतीजावाद या किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने आवंटन नीति में बड़ा बदलाव किया है। मंत्री कुमावत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नई नीति के तहत अब नई दुग्ध सहकारी समितियां और दूध संकलन केंद्र (Milk Collection Centres) खोलने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए आवेदन से लेकर अंतिम आवंटन तक सब कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
गुणवत्ता सुधार: स्वयं के खर्च पर लगा सकेंगे BMC
दूध की शुद्धता और गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बल्क मिल्क कूलर (BMC) सबसे अहम होते हैं। इस दिशा में एक बड़ा नीतिगत सुधार करते हुए सरकार ने अनुमति दे दी है कि अब दुग्ध समितियां अपने स्वयं के पूंजी निवेश (Self-funding) से भी BMC स्थापित कर सकेंगी। इससे समितियों को सरकारी आवंटन का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और दूध खराब होने की समस्या दूर होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर को बंपर बूस्ट: नए प्लांट्स बनकर तैयार
बैठक में राज्य भर में तैयार हो चुके डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के उद्घाटन और नए प्रोजेक्ट्स के शिलान्यास की रूपरेखा भी तय की गई।
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जयपुर डेयरी: यहां प्रतिदिन 10 लाख लीटर क्षमता वाली एक नई और अति-आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट पूरी तरह से बनकर तैयार है।
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राजसमंद: दुग्ध उत्पादन को गति देने के लिए 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने जा रहा है।
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पशु आहार (Cattle Feed) प्लांट्स: पाली में 300 टन प्रतिदिन और गुलाबपुरा में 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक कैटल फीड प्लांट बनकर तैयार हैं।
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इसके अलावा, कोटा में 150 टन प्रतिदिन क्षमता के नए कैटल फीड प्लांट के भूमि पूजन की रणनीतिक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
लंबित भुगतानों पर सख्त निर्देश
अधिकारियों को निर्देश देते हुए डेयरी मंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट में की गई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, उन्हें तय डेडलाइन के भीतर धरातल पर उतारा जाए। बैठक में 'मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना' और 'पन्नाधाय बाल गोपाल योजना' की जमीनी हकीकत और प्रगति की भी समीक्षा की गई।
मंत्री जोराराम कुमावत ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि पशुपालकों और डेयरियों से जुड़े किसी भी प्रकार के लंबित भुगतान को तुरंत प्रभाव से क्लियर किया जाए। सरकार का मुख्य ध्येय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर पशुपालकों की जेब में सीधा पैसा पहुंचाना है और इस काम में किसी भी स्तर पर लालफीताशाही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Disclaimer (अस्वीकरण):
यह समाचार रिपोर्ट राजस्थान सरकार के डेयरी एवं पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की आधिकारिक जानकारियों और प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य जनहित में सरकारी योजनाओं, नीतियों में बदलाव और आधारभूत ढांचे के विकास की सटीक सूचना पाठकों तक पहुंचाना है।
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