पत्रकार सुरक्षा कानून और भूखंड आवंटन की मांग: करौली में पत्रकारों ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
करौली: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में काम करने वाले पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की है। राजस्थान के करौली जिले में शुक्रवार, 21 जून को पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक अहम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से 'पत्रकार सुरक्षा कानून' जल्द से जल्द लागू करने और जिले में पत्रकारों के लिए आवासीय भूखंड आवंटित करने की प्रमुख मांग उठाई गई है।
इस खबर की मुख्य बातें:
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करौली जिले के पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा और कल्याण को लेकर जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।
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'पत्रकार सुरक्षा कानून' को शीघ्र लागू करने और उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग।
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हाल ही में हिंडौन सिटी में हुए पत्रकार सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित किए गए थे ये प्रस्ताव।
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पत्रकारों के लिए आवासीय भूखंड, स्वास्थ्य व दुर्घटना बीमा और आसान अधिमान्यता (Accreditation) प्रक्रिया की अपील।
लोकतंत्र के प्रहरियों पर बढ़ते खतरे को लेकर चिंता कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। वे जनता की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्पक्षता के साथ शासन तक पहुंचाते हैं। हालांकि, मौजूदा समय में सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों को आए दिन धमकियों, शारीरिक हमलों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हिंडौन सिटी सम्मेलन में बनी थी सहमति गौरतलब है कि पिछले दिनों जिले के हिंडौन सिटी में एक वृहद पत्रकार सम्मेलन और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले भर के मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया था और पत्रकारिता क्षेत्र में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की थी। इसी गोष्ठी में सर्वसम्मति से पत्रकारों के हितों से जुड़े कई प्रस्ताव पारित किए गए थे, जिन्हें अब ज्ञापन के रूप में प्रशासन के सामने रखा गया है।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें पत्रकारों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में कई अहम बिंदुओं पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है:
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पत्रकार सुरक्षा कानून: पत्रकारों पर होने वाले हमलों को रोकने और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई के लिए कड़ा कानून लागू किया जाए।
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आवासीय योजना: करौली जिले में कार्यरत पत्रकारों के लिए आवासीय भूखंड (Residential Plots) आवंटन योजना शुरू की जाए।
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बीमा और कल्याण कोष: पत्रकारों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और 'पत्रकार कल्याण कोष' को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
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झूठे मुकदमों पर रोक: पत्रकारों को फंसाने के लिए दर्ज होने वाले फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच हो और अधिमान्यता (एक्रिडिटेशन) प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल किया जाए।
स्वतंत्र कार्य वातावरण की अपील प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि वे इन न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अपनी अनुशंसा भेजें। पत्रकारों का कहना है कि बिना किसी भय या दबाव के काम करने के लिए एक सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण का होना बेहद जरूरी है। यदि पत्रकार हितों की इसी तरह अनदेखी होती रही, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं होगा।
Disclaimer: यह समाचार सामग्री प्रेस विज्ञप्ति और स्थानीय पत्रकारों द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गई है। इसका लक्ष्य आमजन तक निष्पक्ष जानकारी पहुंचाना है। यह पोर्टल किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत दावों या मांगों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
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