राजसमंद: उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने ली जिला स्तरीय समीक्षा बैठक, पेयजल और बिजली आपूर्ति में कोताही बर्दाश्त नहीं
राजसमंद, राजस्थान:
उपमुख्यमंत्री एवं राजसमंद प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने गुरुवार को जिला परिषद सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं, विकास कार्यों और आमजन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई।
प्रमुख निर्देश: पेयजल और विद्युत व्यवस्था पर फोकस
उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में पेयजल और बिजली की आपूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए:
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त्वरित समाधान: बिजली और पानी से जुड़ी शिकायतों का तुरंत निराकरण हो, इसमें किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
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अवैध कनेक्शन: अवैध जल कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आमजन को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके।
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समयबद्ध कार्य: सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे।
फ्लैगशिप योजनाओं और 'वंदे गंगा' की समीक्षा
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने 'वंदे गंगा' (जल संरक्षण-जन अभियान) को मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का महत्वाकांक्षी अभियान बताते हुए कहा कि इसे सफल बनाने के लिए हर स्तर पर 'जल-जागृति' लाना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने निम्नलिखित योजनाओं की प्रगति जांची:
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कृषि और ग्रामीण विकास: कुसुम योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और स्वामित्व योजना।
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सामाजिक उत्थान: लाडो प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना।
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महिला सशक्तिकरण: 'पंच गौरव योजना' के तहत लखपति दीदी, सोलर दीदी, ड्रोन दीदी एवं कृषि सखी जैसे कार्यक्रमों की समीक्षा की।
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स्वास्थ्य एवं आधारभूत संरचना: आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण/शहरी) और मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0।
जनप्रतिनिधियों के सुझावों पर त्वरित कार्रवाई
बैठक में सांसद महिमा कुमारी मेवाड़, राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं को रखा। इनमें मुख्य रूप से बाघेरी परियोजना से जलापूर्ति और विद्युत सुधार (RDSS) जैसे मुद्दे शामिल थे। उपमुख्यमंत्री ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए पीएचईडी (PHED) और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
जल संरक्षण का जन आंदोलन
डॉ. बैरवा ने जल को जीवनधारा बताते हुए कहा कि जल संरक्षण को केवल सरकारी काम नहीं, बल्कि 'जन आंदोलन' का स्वरूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं और ग्रामीण समुदायों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचयन के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट जिला प्रशासन एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। योजनाओं की विस्तृत जानकारी और विभागीय अपडेट के लिए राजस्थान सरकार के संबंधित आधिकारिक पोर्टल का अवलोकन करें।
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