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राजस्थान में भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का 'वज्रप्रहार': 1 आईएएस सहित 103 अफसर निलंबित, 6 बर्खास्त

By Jyoti Singh 📅 29 May 2026 👁️ 35 Views ⏱️ 1 Min Read
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का 'वज्रप्रहार': 1 आईएएस सहित 103 अफसर निलंबित, 6 बर्खास्त

जयपुर: राजस्थान में भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शासन-प्रशासन के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। आमजन को एक पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले कुछ समय में कई बड़े एक्शन लिए हैं।

कार्रवाई के मुख्य आंकड़े (एक नजर में)

सरकार द्वारा की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के तहत कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है:

  • निलंबन (Suspension): 1 आईएएस (IAS) अधिकारी सहित कुल 103 अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

  • बर्खास्तगी (Dismissal): न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

  • पेंशन पर रोक: भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए 11 अधिकारियों की आजीवन पेंशन (100%) रोक दी गई है।

  • अभियोजन स्वीकृति: रिश्वत, ट्रैप, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के 108 मामलों में मुकदमे की मंजूरी दी गई है।

  • अन्य कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत 37 अन्य मामलों में भी कठोर कदम उठाए गए हैं।

न्यायालय में दोषी साबित होने पर सीधी बर्खास्तगी

रिश्वत और पद के दुरुपयोग के मामलों में जिन अधिकारियों को कोर्ट ने दोषी माना है, उन्हें सरकार ने तुरंत प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है।

बर्खास्त किए गए अधिकारियों की सूची:

अधिकारी का नाम पद और विभाग
भरत प्रकाश मेघवाल तत्कालीन विकास अधिकारी (सुवाणा, भीलवाड़ा), पीडब्ल्यूडी
राजेश कुमार नैनावत तत्कालीन कृषि उप निदेशक (झुंझुनूं)
महावीर सिंह आसीवाल तत्कालीन सहायक आयुक्त भरतपुर (वित्त कर)
डॉ. राम मोहन सिंह चौहान चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर)
डॉ. मुरलीधर शर्मा चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा)
डॉ. मनोहर लाल चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी रामगढ़, अलवर)

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री ने हाल ही में जनस्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई की है। पीएचईडी (PHED) की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता जांच में फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

इसी प्रकार, एसीजेएम-4 (कोटा) के तत्कालीन एपीपी हरिसिंह मीना को एसीबी (ACB) कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद नौकरी से हटा दिया गया।

इन 11 अधिकारियों की रोकी गई आजीवन पेंशन

सरकार ने जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले 11 अधिकारियों को दंडित करते हुए उनकी शत-प्रतिशत पेंशन पर आजीवन रोक लगा दी है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • प्रशासनिक अधिकारी: बनवारी लाल मीणा (RAS), देवेन्द्र सिंह ढिल्लो (RAS), महेन्द्र सिंह (RPS), देशराज नूनिया (तत्कालीन अधिशाषी अभियंता)।

  • चिकित्सा अधिकारी: डॉ. शिवनारायण यादव, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कोठारी, डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, डॉ. लक्ष्मण दत्त शर्मा, डॉ. अविनाश कुमार शर्मा।

  • अन्य विभाग: मनोहर लाल सिसोदिया (तत्कालीन विकास अधिकारी), नृसिंह रेबारी (सहायक अभियंता), सुरेश माथुर (अधिशाषी अभियंता)।

नोट: इसके अलावा डॉ. विलास राव गुल्हाने (तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी) को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। वहीं, देवी सिंह (तत्कालीन एसडीएम, डीग), मायालाल सैनी, राकेश चौहान, विशाल सक्सेना (पीएचईडी अधिकारी) सहित कई अन्य पर अभियोजन की स्वीकृति दी गई है।


Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार सार्वजनिक हित और सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। लेख में दिए गए तथ्य, नाम और आंकड़े राज्य सरकार द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं। कानूनी मामलों और विभागीय कार्रवाई की नवीनतम और विस्तृत जानकारी के लिए पाठकों को संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या विज्ञप्ति का संदर्भ लेने की सलाह दी जाती है।

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Jyoti Singh

ज्योति सिंह एक कुशल पत्रकार, शोध विश्लेषक और प्रमुख डिजिटल समाचार मंच मिशन की आवाज़ की सह-संस्थापक हैं। अपने पति भूपेंद्र सिंह सोनवाल (संस्थापक और मुख्य संपादक) के साथ मिलकर काम करते हुए, ज्योति न केवल पर्दे के पीछे एक सहयोगी हैं, बल्कि मीडिया नेटवर्क के विकास की मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनकी जीवन कहानी उच्च जोखिम वाली खोजी पत्रकारिता और गहरे पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि एक साझा दृष्टिकोण स्वतंत्र क्षेत्रीय मीडिया में क्रांति ला सकता है।

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