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संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का बड़ा कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य में 'फ्री नेविगेशन' के लिए पेश किया प्रस्ताव; मार्को रुबियो ने इसे बताया UN की "परीक्षा"

US UNSC Resolution Strait of Hormuz: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए UN में प्रस्ताव पेश किया है। मार्को रुबियो ने इसे ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और UN की साख की परीक्षा बताया है।
द्वारा News Room 📅 06 May 2026 👁️ 54 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का बड़ा कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य में 'फ्री नेविगेशन' के लिए पेश किया प्रस्ताव; मार्को रुबियो ने इसे बताया UN की "परीक्षा"

अमेरिका ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव (Draft Resolution) पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) की रक्षा करना और ईरान द्वारा पैदा की जा रही कथित बाधाओं को रोकना है।

ईरान पर 'आर्थिक बंधक' बनाने का आरोप

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों पर हमले, समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और अवैध टोल वसूलने की कोशिशों के जरिए दुनिया की अर्थव्यवस्था को "बंधक" बना रहा है।

रुबियो ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर तैयार किया गया है। इसे बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों के सहयोग से तैयार किया गया है।

प्रस्ताव की मुख्य मांगें

संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए इस मसौदे में ईरान से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  • व्यापारिक जहाजों पर हमले और समुद्री माइनिंग को तत्काल रोकना।

  • ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों की संख्या और स्थान का खुलासा करना।

  • इन सुरंगों को हटाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग करना।

  • एक मानवीय गलियारा (Humanitarian Corridor) बनाने का समर्थन करना।

UN के वजूद पर सवाल?

व्हाइट हाउस में एक ब्रीफिंग के दौरान मार्को रुबियो ने इसे "संयुक्त राष्ट्र के लिए एक वास्तविक परीक्षा" करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय नौवहन की स्वतंत्रता जैसे सीधे और स्पष्ट मुद्दे पर एकजुट नहीं हो सकता, तो संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की उपयोगिता पर सवाल उठना लाजमी है।

गौरतलब है कि पिछले महीने रूस और चीन ने इसी तरह के एक प्रस्ताव पर वीटो (Veto) कर दिया था। रुबियो का मानना है कि इस बार रूस और चीन को सहयोग करना चाहिए, क्योंकि होर्मुज में अस्थिरता वैश्विक व्यापार को बाधित कर दर्जनों देशों में "आर्थिक अराजकता" पैदा कर सकती है।

पुराना घटनाक्रम

इससे पहले अप्रैल 2026 में, रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उद्देश्य से लाए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 15 सदस्यीय परिषद में 11 देशों ने पक्ष में मतदान किया था, जबकि पाकिस्तान और कोलंबिया अनुपस्थित रहे थे।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक सरकारी बयानों और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों द्वारा प्राप्त जानकारी पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होने वाले आगामी मतदान और उसके परिणामों की आधिकारिक पुष्टि भविष्य के कूटनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।


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