जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि बच्चों की जान और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) श्री राजेश यादव ने सूबे के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को एक कड़ा फरमान जारी किया है। इसके तहत राज्य में जितने भी स्कूल भवन जर्जर या खस्ताहाल घोषित हो चुके हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तुरंत गिराया (ध्वस्त किया) जाएगा। इसके साथ ही, वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना बच्चों को खुले आसमान के नीचे या पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाने पर भी पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
इस खबर की मुख्य बातें:
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तत्काल ध्वस्तीकरण: प्रदेश के सभी चिन्हित जर्जर और खतरनाक स्कूल भवनों को प्राथमिकता पर तुरंत ढहाने का आदेश।
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खुले में पढ़ाई बंद: मौसम और सुरक्षा को देखते हुए बच्चों को खुले मैदान में बैठाने पर रोक, तुरंत वैकल्पिक व सुरक्षित स्थान ढूंढने के निर्देश।
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हाईकोर्ट के आदेश पर सर्वे: माननीय न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत पूरे राजस्थान में खस्ताहाल स्कूलों का व्यापक सर्वे जारी।
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गुणवत्ता पर फोकस: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) और मॉडल स्कूलों की समीक्षा के साथ ‘राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण’ (SSSA) के गठन पर चर्चा।
जर्जर भवनों में पढ़ाई पर ‘नो एंट्री’, अधिकारियों को अल्टीमेटम
जयपुर के शिक्षा संकुल सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश यादव ने विभिन्न प्रकोष्ठों के कामकाज की बारीकी से जांच की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों को एक सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षणिक माहौल देना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि जिन स्कूलों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, वहां किसी भी सूरत में कक्षाएं आयोजित नहीं की जानी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि बिल्डिंग असुरक्षित होने पर बच्चों को बाहर खुले मैदान में बैठा दिया जाता है, लेकिन एसीएस ने इस पर भी सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धूप, बारिश या अन्य अनहोनी के खतरे को देखते हुए विद्यार्थियों को खुले में न बैठाया जाए। अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत किसी सुरक्षित सरकारी भवन, सामुदायिक केंद्र या अन्य वैकल्पिक स्थान पर बच्चों की पढ़ाई की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करें।
माननीय न्यायालय के निर्देशों के तहत हो रहा है प्रदेशव्यापी सर्वे
बैठक में जानकारी दी गई कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में राजस्थान के सभी जिलों में सरकारी स्कूल परिसरों का व्यापक सर्वेक्षण (Survey) कराया जा रहा है। इस सर्वे का मकसद उन सभी इमारतों, कमरों या दीवारों को चिन्हित करना है जो समय के साथ कमजोर हो चुकी हैं और जिनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। विभाग इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तुरंत बजट आवंटित कर जर्जर ढांचों को हटाने और नए निर्माण की दिशा में काम कर रहा है।
KGBV, मॉडल स्कूलों और सिविल कार्यों की प्रगति की समीक्षा
इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल स्कूल भवनों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विभाग के तहत चल रहे विभिन्न सिविल और विकास कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत:
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कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (KGBV) के बुनियादी ढांचे और वहां मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया गया।
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स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल विद्यालय और पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देखी गई।
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विशेष श्रेणी के विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों में आ रही देरी को लेकर एसीएस ने नाराजगी जताई और सभी लंबित मामलों को एक निश्चित समय सीमा (Timeframe) के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।
SSSA मॉडल: राजस्थान के स्कूलों के लिए बनेंगे नए मानक
बैठक के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) के तहत प्रस्तावित राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (SSSA) की स्थापना को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) की निदेशक श्रीमती श्वेता फगड़िया ने इस संबंध में अब तक आयोजित की गई विभिन्न कार्यशालाओं (Workshops) और हुई प्रगति का पूरा ब्यौरा पेश किया।
इस पर बात करते हुए राज्य परियोजना निदेशक एवं स्कूल शिक्षा आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने अधिकारियों को एक बेहतरीन सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा ढांचा तैयार करने के लिए हमें अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक चल रहे SSSA मॉडल्स का गहराई से अध्ययन करना चाहिए। दूसरे राज्यों के अच्छे अनुभवों और तकनीकी बारीकियों को अपनाकर राजस्थान के सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों के लिए गुणवत्तापूर्ण मानक तैयार किए जा सकेंगे, जिससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
इस उच्च स्तरीय बैठक में अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक श्री अशोक कुमार मीणा सहित शिक्षा विभाग के तमाम प्रकोष्ठों के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्य अभियंता उपस्थित रहे, जिन्हें धरातल पर इन आदेशों को तुरंत लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।