लाडो प्रोत्साहन योजना की बड़ी समीक्षा: तकनीकी खामियां दूर कर बालिकाओं को समय पर लाभ देने के सख्त निर्देश

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जयपुर। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। गुरुवार को शासन सचिवालय में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) राजेश कुमार यादव की अध्यक्षता में इस योजना की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान ACS राजेश कुमार यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि योजना में आ रही किसी भी तकनीकी बाधा को तुरंत दूर किया जाए। उनका मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि प्रदेश की सभी पात्र बालिकाओं को बिना किसी देरी और पूरी पारदर्शिता के साथ योजना का लाभ सुनिश्चित किया जा सके। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

तकनीकी खामियां दूर कर लंबित आवेदनों का हो निस्तारण

बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ राज्य सरकार की एक प्रमुख फ्लैगशिप योजना है, जो सीधे तौर पर बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण से जुड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि जो भी आवेदन तकनीकी समस्याओं या अन्य कारणों से लंबित हैं, उनका शीघ्रता से निस्तारण किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर पात्र बालिका को बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, तय समय-सीमा के भीतर योजना का लाभ मिल सके।

क्या है लाडो प्रोत्साहन योजना और इसके नए नियम?

इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा पात्र बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य और उच्च शिक्षा के लिए 1.50 लाख रुपये का ‘संकल्प पत्र’ प्रदान किया जाता है। विभाग द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 अगस्त 2024 से लेकर अब तक प्रदेश की 6.50 लाख से अधिक बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं।

इस योजना को और अधिक सुलभ बनाने के लिए सरकार ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब दो से अधिक संतान होने पर लाभ न मिलने की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जो बालिकाएं मान्यता प्राप्त निजी (प्राइवेट) विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उन्हें भी इस योजना के दायरे में शामिल कर लिया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के अहम आंकड़े और भुगतान की स्थिति

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के तहत 4,531.96 लाख रुपये के विपत्र (बिल) कोषालय को भेजे जा चुके हैं। इनमें से 2,509.48 लाख रुपये का सफल भुगतान इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरेंस सर्विस (ECS) के माध्यम से किया जा चुका है। वहीं, 2,022.48 लाख रुपये के विपत्र अभी ईसीएस की प्रक्रिया में हैं, जिन्हें जल्द ही क्लियर कर दिया जाएगा।

विभाग ने यह भी जानकारी दी कि योजना के तहत अब तक 2,56,808 बालिकाओं को तीसरी किस्त का लाभ मिल चुका है। शेष बचे हुए पात्र आवेदनों पर भुगतान की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

निष्कर्ष: शासन सचिवालय में हुई यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन बालिकाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को लेकर बेहद गंभीर है। तकनीकी बाधाओं को दूर करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के ACS के निर्देशों से भविष्य में ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ की गति और तेज होगी। इससे बालिकाओं के सशक्तिकरण और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने के राज्य सरकार के प्रयासों को एक नई दिशा मिलेगी।

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