सूरौठ (करौली): अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 78वें स्थापना दिवस और राष्ट्रीय विद्यार्थी चेतना सप्ताह के ऐतिहासिक अवसर पर करौली जिले की सूरौठ नगर इकाई द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। संगठन की ओर से सामाजिक सरोकार और जनकल्याणकारी गतिविधियों के अंतर्गत क्षेत्र के जरूरतमंद, गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षण सामग्री का वितरण किया गया।
इस सेवा कार्य का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की मदद करना है जो आर्थिक तंगी या उचित मार्गदर्शन के अभाव में पढ़ाई-लिखाई से पिछड़ जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने और अपनी प्रतिभा के बल पर अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया गया।
बच्चों को बांटी गई जरूरी स्टेशनरी सामग्री
आयोजन के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री जैसे किताबें, कॉपियां, पेन, पेंसिल और अन्य आवश्यक स्टेशनरी के पैकेट सौंपे। नई किताबें और पढ़ाई के साधन पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती थी, जो इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता रही।
इस मौके पर छात्र नेताओं ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा प्राप्त करना देश के प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। किसी भी होनहार बच्चे की प्रतिभा और उसके भविष्य का मार्ग केवल इसलिए अवरुद्ध नहीं होना चाहिए क्योंकि उसका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है।
राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का संकल्प
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने संगठन की रीति-नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषद केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने स्थापना काल से ही शिक्षा, संस्कार और समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के कार्यों में निरंतर सक्रिय रही है। उन्होंने समाज के सक्षम और प्रबुद्ध नागरिकों से भी अपील की कि वे आगे आएं और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा में अपना सहयोग दें, ताकि एक ऐसा सुदृढ़ समाज बने जहाँ कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे।
निष्कर्ष: सूरौठ इकाई द्वारा आयोजित यह सामाजिक गतिविधि न केवल जरूरतमंद बच्चों के लिए मददगार साबित होगी, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश देगी। इस तरह के जमीनी प्रयास ही धरातल पर वास्तविक बदलाव लाते हैं। इस सेवा कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से नगर अध्यक्ष बलवीर वर्मा, नगर उपाध्यक्ष हुक्म सिंह, नगर मंत्री मनोज कुमार, अभिषेक शर्मा, इकाई अध्यक्ष कन्हैया जाटव और एसएफडी संयोजक आशीष बंशीवाल सहित परिषद के अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।